झारखंड की महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार का सहारा, छह जिलों में बांटे गए एगकार्ट
रांची। झारखंड में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति (एनईसीसी) ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत राज्य के छह जिलों में महिलाओं को अंडा बिक्री के व्यवसाय से जोड़ने के लिए एगकार्ट यानी अंडा बेचने का ठेला उपलब्ध कराया गया है।
एनईसीसी का उद्देश्य महिलाओं को छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने का अवसर देना और उनकी आय बढ़ाने में मदद करना है। इस पहल के तहत राज्य के रांची, गुमला, लोहरदगा, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम और गोड्डा जिलों में महिलाओं को एगकार्ट दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रत्येक जिले में 10-10 एगकार्ट उपलब्ध कराए गए हैं। इसके लिए एनईसीसी ने स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पाद संघ से जुड़ी महिलाओं का चयन किया है।
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल
एनईसीसी ने झारखंड में यह कार्यक्रम प्रदान संस्था के माध्यम से संचालित होने वाले सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) के सहयोग से शुरू किया है। सीएलएफ के जरिए उन महिलाओं का चयन किया गया है, जो पहले से स्वयं सहायता समूहों या ग्रामीण आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं।
एनईसीसी के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं मेहनती होती हैं और उनमें छोटे व्यवसाय को सफल बनाने की क्षमता होती है। इसी सोच के साथ उन्हें अंडा बिक्री के माध्यम से नियमित आय का साधन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर
एनईसीसी के सीओओ ए. कुमार ने बताया कि झारखंड की महिलाएं काफी मेहनती हैं। प्रदान संस्था के सहयोग से महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि संस्था की मंशा महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें और अपने परिवार की आय में योगदान दे सकें।
उन्होंने बताया कि एगकार्ट के माध्यम से महिलाएं स्थानीय बाजारों में अंडे की बिक्री कर सकेंगी। इससे उन्हें कम लागत में व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलेगा।
देशभर में बांटे गए 2300 एगकार्ट
एनईसीसी के अनुसार, केवल झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में इस वर्ष स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए एगकार्ट वितरण कार्यक्रम चलाया गया है।
पूरे देश में इस साल करीब 2300 एगकार्ट वितरित किए गए हैं। इस योजना पर कंपनी ने लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
इस पहल के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ-साथ अंडे की बिक्री और खपत को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे व्यवसायों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अगर बाजार और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे बेहतर आय अर्जित कर सकती हैं।
अंडा बिक्री का व्यवसाय कम निवेश में शुरू किया जा सकता है और इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है। ऐसे में यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है।
आगे भी विस्तार की योजना
एनईसीसी की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आने वाले समय में इस तरह की योजनाओं को और क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। संस्था का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
झारखंड में शुरू की गई यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। एगकार्ट के जरिए महिलाएं अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकेंगी और धीरे-धीरे अपनी आय के स्रोत को मजबूत कर पाएंगी।
फिलहाल छह जिलों में शुरू हुए इस कार्यक्रम से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण और अन्य जरूरी सहयोग भी उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि वे इस व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित कर सकें।