बिहार

पुलिया टूटी चार हजार लोगों का रास्ता बंद

Kavita2
2 Sept 2026 12:46 PM IST
पुलिया टूटी चार हजार लोगों का रास्ता बंद
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भोजपुर। जिले के बड़हरा प्रखंड में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ बाढ़ का असर लगातार गंभीर होता जा रहा है। बुधवार को गंगा के तेज बहाव के कारण महुली घाट से खवासपुर जानकी बाजार जाने वाली मुख्य सड़क पर बनी पुलिया पूरी तरह टूट गई। पुलिया क्षतिग्रस्त होने से इस मार्ग पर आवागमन ठप हो गया है और आसपास के गांवों की करीब चार हजार की आबादी के सामने आवाजाही का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

जानकारी के अनुसार, गंगा पार महुली घाट से खवासपुर जानकी बाजार जाने वाली सड़क पर सरयू राय के डेरा स्थित सुखदेव ठाकुर के घर के समीप यह पुलिया बनी हुई थी। लगातार बढ़ते जलस्तर और पानी के तेज दबाव के कारण बुधवार को पुलिया टिक नहीं सकी और उसका हिस्सा टूट गया। इसके बाद सड़क संपर्क बाधित हो गया।

चार हजार लोगों की बढ़ी परेशानी

पुलिया टूटने का सीधा असर आसपास के गांवों में रहने वाली करीब चार हजार की आबादी पर पड़ा है। स्थानीय लोगों के लिए यह सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं बल्कि बाजार, जरूरी सामान और दैनिक जरूरतों तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता भी है।

रास्ता बंद होने के कारण ग्रामीणों को अब दूसरे और अपेक्षाकृत लंबे मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। बाढ़ के बीच वैकल्पिक रास्तों से आवाजाही भी आसान नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है।

बाजार जाने का प्रमुख रास्ता बंद

महुली घाट से खवासपुर जानकी बाजार को जोड़ने वाला यह मार्ग आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीण इसी रास्ते से बाजार पहुंचकर राशन, सब्जी, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करते हैं।

पुलिया टूटने के बाद इस रास्ते से सामान्य आवागमन संभव नहीं रह गया है। ऐसे में लोगों को रोजमर्रा का सामान लाने के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए जानकी बाजार पर निर्भर हैं।

तेज बहाव ने तोड़ी पुलिया

स्थानीय लोगों के मुताबिक गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण क्षेत्र में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। तेज बहाव पुलिया के आसपास भी बना हुआ था। बुधवार को पानी का दबाव इतना बढ़ गया कि पुलिया क्षतिग्रस्त होकर टूट गई।

पुलिया टूटने के बाद सड़क के दोनों ओर संपर्क प्रभावित हो गया। तेज बहाव के बीच क्षतिग्रस्त हिस्से से निकलने की कोशिश करना बेहद जोखिम भरा है। ग्रामीणों को भी टूटे हिस्से के पास जाने से बचने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की जरूरत है।

बाढ़ के बीच जोखिम भरा हुआ सफर

गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण पहले से ही बड़हरा प्रखंड के नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में बाढ़ का दबाव बना हुआ है। अब पुलिया टूटने से ग्रामीणों की समस्या और बढ़ गई है।

टूटे हिस्से के आसपास पानी का बहाव तेज होने के कारण वहां से पैदल या किसी वाहन से निकलना खतरे से खाली नहीं है। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए वैकल्पिक रास्तों से लंबी दूरी तय करना विशेष रूप से कठिन हो रहा है।

रोजमर्रा की जरूरतों पर असर

सड़क संपर्क टूटने का प्रभाव ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। बाजार तक पहुंचने में ज्यादा समय लग रहा है। आवश्यक वस्तुएं लाने के लिए लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

यदि बाढ़ का पानी और बढ़ता है तो ग्रामीणों के लिए दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता भी चुनौती बन सकती है। इसी कारण स्थानीय लोग जल्द से जल्द सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था किए जाने की जरूरत बता रहे हैं।

वैकल्पिक रास्तों का सहारा

फिलहाल पुलिया टूटने के बाद लोगों को दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे यात्रा की दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं। जिन लोगों को रोज कामकाज या खरीदारी के लिए बाजार जाना पड़ता है, उनके सामने सबसे अधिक समस्या है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई रास्तों पर पहले से ही पानी और कीचड़ की समस्या रहती है। ऐसे में मुख्य सड़क की पुलिया टूटने से यातायात का दबाव दूसरे मार्गों पर भी बढ़ सकता है।

गंगा का बढ़ता जलस्तर बना चिंता

बड़हरा प्रखंड गंगा से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर यहां के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान स्थिति में पानी के तेज बहाव ने सड़क और पुलिया जैसी आधारभूत संरचनाओं पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।

पुलिया टूटने की घटना से यह चिंता बढ़ गई है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो क्षेत्र के दूसरे संपर्क मार्गों को भी नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों के लिए ऐसे समय में सुरक्षित सड़क संपर्क बनाए रखना बेहद जरूरी है।

ग्रामीणों को जल्द समाधान की उम्मीद

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन क्षतिग्रस्त पुलिया और आसपास की स्थिति का जायजा लेकर जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करेगा। फिलहाल तेज बहाव के बीच स्थायी मरम्मत करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन लोगों की आवाजाही के लिए सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराना आवश्यक है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके बंद होने से हजारों लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। पानी कम होने के बाद पुलिया की मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत भी पड़ेगी।

जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी चुनौती

सड़क बंद होने से केवल बाजार तक पहुंच ही प्रभावित नहीं हुई है। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने या किसी जरूरी सेवा तक पहुंचने में भी अतिरिक्त समय लग सकता है। बाढ़ के समय ऐसी देरी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।

इसी तरह विद्यार्थियों, कामकाजी लोगों और छोटे कारोबारियों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए ग्रामीण इस समस्या का जल्द समाधान चाहते हैं।

बाढ़ ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किल

गंगा का बढ़ता पानी पहले से ही बड़हरा क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा रहा था। अब महुली घाट-खवासपुर जानकी बाजार मार्ग की पुलिया टूटने से करीब चार हजार लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है।

फिलहाल ग्रामीण वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं टूटे हिस्से के पास तेज बहाव के कारण वहां से निकलना जोखिम भरा बना हुआ है। आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर और प्रशासन की ओर से की जाने वाली व्यवस्था पर स्थानीय लोगों की नजर रहेगी।

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