माइनिंग विवाद पर गरमाई झारखंड की सियासत निशिकांत दुबे ने विपक्ष को घेरा
Jharkhand. झारखंड। माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल को लेकर झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए। निशिकांत दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार ने ऐसी व्यवस्था बनाई है, जिससे झारखंड की कमाई पर असर पड़ने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को इस पूरे मामले की राजनीतिक सच्चाई को समझने की जरूरत है।
भाजपा सांसद ने कहा कि दुनिया के कई विकसित क्षेत्र जैसे स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, पेरिस और लंदन अपनी समृद्धि के लिए केवल खनिज संसाधनों पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी राज्य या व्यक्ति की तरक्की केवल माइनिंग से नहीं हो सकती, बल्कि विकास के लिए सोच और नीतियां महत्वपूर्ण होती हैं।
निशिकांत दुबे ने कहा कि झारखंड को आर्थिक विकास के लिए नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का विरोध करने से पहले व्यापक सोच के साथ राज्य के हितों को देखना चाहिए।
उन्होंने झारखंड में खनिज संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। सांसद ने कहा कि राज्य में पत्थर, मिट्टी, रेत और अन्य संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर पहले से ही कई गतिविधियां चल रही हैं, ऐसे में कोयले को लेकर अलग रुख क्यों अपनाया जा रहा है।
MMDR संशोधन बिल को लेकर झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टियां केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध कर रही हैं। वहीं भाजपा की ओर से इसे विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़कर बताया जा रहा है। निशिकांत दुबे के बयान के बाद राज्य में खनन नीति और प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अलग-अलग दल अपने-अपने तर्क सामने रख रहे हैं।