रांची। राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच फर्जी दस्तावेजों के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के प्रयासों को लेकर निर्वाचन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। शिकायतें मिलने के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को अलर्ट जारी किया है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरती जाए, जहां कोई विदेशी नागरिक भारतीय नागरिक के खतियान, वंशावली या पारिवारिक दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ कर खुद को भारतीय नागरिक या किसी भारतीय परिवार का वंशज बताने का प्रयास कर रहा हो।

निर्वाचन विभाग के अनुसार, मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए कुछ लोगों द्वारा गलत या असत्य जानकारी देने की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे मामलों में संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) को तत्काल सूचना देने और दस्तावेजों की गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के उद्देश्य से जानबूझकर गलत विवरण, झूठा लिखित बयान या गलत घोषणा प्रस्तुत करने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करने के बाद लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कदम उठाने को कहा गया है।

उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सुनवाई प्रक्रिया को पूरी गंभीरता के साथ पूरा किया जाए। किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए खतियान, वंशावली या पारिवारिक संबंध से जुड़े अन्य दस्तावेजों की प्रमाणिकता की सावधानीपूर्वक जांच की जाए।

निर्वाचन विभाग का कहना है कि मतदाता सूची में केवल योग्य और पात्र नागरिकों के नाम ही शामिल किए जाने चाहिए। इसके लिए दस्तावेजों का सत्यापन बेहद जरूरी है। किसी भी प्रकार की जालसाजी या गलत जानकारी के आधार पर मतदाता सूची में नाम शामिल होने से रोकने के लिए जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाया जा रहा है।

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलत नाम हटाने और मतदाताओं की जानकारी को सत्यापित करने का काम किया जा रहा है।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सुनवाई के दौरान केवल दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लें और किसी भी संदिग्ध मामले को नजरअंदाज न करें। खासकर ऐसे मामलों में जहां नागरिकता या पारिवारिक पहचान से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठ रहे हों, वहां अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए।

निर्वाचन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना एक कानूनी प्रक्रिया है और इसमें गलत जानकारी देना गंभीर मामला माना जाता है। यदि जांच में किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर गलत दस्तावेज या जानकारी प्रस्तुत करने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी शिकायतों पर नजर रखने और समय पर कार्रवाई करने को कहा गया है। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों की जांच कर उनकी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए मतदाता सूची की शुद्धता को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। निर्वाचन विभाग का मानना है कि सही मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती के लिए आवश्यक है।

फिलहाल एसआईआर अभियान के दौरान दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त किया जा रहा है। निर्वाचन विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य फर्जी तरीके से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के प्रयासों पर रोक लगाना और वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।

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