भिवानी।आधी रात जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, उस समय एक परिवार अपने सदस्य की जान बचाने के लिए एबी पॉजिटिव रक्त की तलाश में भटक रहा था। मरीज की हालत बिगड़ने के बाद चिकित्सकों ने तत्काल फ्रेश ब्लड की आवश्यकता बताई थी, लेकिन देर रात कई ब्लड बैंकों में संपर्क करने के बावजूद रक्त उपलब्ध नहीं हो सका। संकट की इस घड़ी में सिरसा बिजली निगम में कार्यरत राजेश जांगड़ा मददगार बने। सूचना मिलते ही वह बिना देर किए भिवानी पहुंचे और रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चरखी दादरी जिले के बौंद निवासी एक मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि मरीज के लिए एबी पॉजिटिव फ्रेश ब्लड की तत्काल आवश्यकता है। रक्त की जरूरत की जानकारी मिलते ही परिवार के सदस्य सक्रिय हो गए और आसपास के कई ब्लड बैंकों से संपर्क किया। देर रात का समय होने के कारण उन्हें आवश्यक रक्त कहीं उपलब्ध नहीं मिला।

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कम समय में एबी पॉजिटिव रक्तदाता तलाशने की थी। कई प्रयासों के बाद भी जब कोई व्यवस्था नहीं हो पाई, तब परिजनों ने शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा से संपर्क किया। रक्तदान के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय डुडेजा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत संभावित रक्तदाताओं से संपर्क करना शुरू किया।

राजेश डुडेजा ने सिरसा बिजली निगम में कार्यरत राजेश जांगड़ा से बात की और उन्हें मरीज की स्थिति तथा रक्त की तत्काल जरूरत के बारे में बताया। सूचना मिलते ही राजेश जांगड़ा ने समय या दूरी की परवाह किए बिना रक्तदान के लिए हामी भर दी। उन्होंने आधी रात को ही भिवानी पहुंचने का फैसला किया और बिना किसी देरी के वहां के लिए रवाना हो गए।

भिवानी पहुंचने के बाद राजेश जांगड़ा ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर मरीज के लिए रक्तदान किया। देर रात रक्त उपलब्ध हो जाने से मरीज के परिजनों ने राहत की सांस ली। जिस समय परिवार के लोग आवश्यक रक्त नहीं मिलने के कारण परेशान थे, उस समय एक अनजान मरीज की सहायता के लिए आगे आना संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बन गया।

राजेश जांगड़ा के इस प्रयास में राजेश डुडेजा की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने सूचना मिलते ही उचित रक्तदाता से संपर्क स्थापित किया और जरूरतमंद परिवार तक सहायता पहुंचाने में सहयोग किया। रक्तदान से जुड़े लोगों के बीच बेहतर समन्वय के कारण आधी रात को भी मरीज के लिए जरूरी रक्त की व्यवस्था संभव हो सकी।

घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि आपात स्थिति में समय पर की गई छोटी-सी पहल भी किसी परिवार के लिए बड़ी उम्मीद बन सकती है। जरूरतमंद मरीज को रक्त उपलब्ध कराने के लिए केवल रक्तदाता का तैयार होना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि समय पर सूचना पहुंचना और रक्तदाता को सही स्थान तक भेजना भी उतना ही जरूरी है। इस मामले में दोनों राजेश ने अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए परिवार की सहायता की।

मरीज के परिजनों के लिए वह रात बेहद मुश्किल रही। एक ओर परिवार के सदस्य की बिगड़ती तबीयत की चिंता थी, वहीं दूसरी ओर आवश्यक रक्त नहीं मिलने की परेशानी थी। कई स्थानों पर प्रयास करने के बाद जब रक्तदाता मिला, तब परिवार को उपचार जारी रहने की उम्मीद जगी। परिजनों ने संकट के समय सहायता के लिए आगे आने वाले रक्तदाता और सहयोग करने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

रक्तदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ने के बावजूद आपात स्थितियों में कई बार विशेष रक्त समूह का रक्तदाता तत्काल नहीं मिल पाता। रात के समय परेशानी और अधिक बढ़ जाती है। ऐसी परिस्थितियों में स्वैच्छिक रक्तदाताओं का नेटवर्क जरूरतमंद मरीजों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनता है। राजेश जांगड़ा और राजेश डुडेजा का प्रयास इसी सामाजिक सहयोग का उदाहरण है।

शतकवीर रक्तदाता के रूप में पहचाने जाने वाले राजेश डुडेजा से संपर्क होने के बाद जिस तेजी से मदद की व्यवस्था की गई, उसने संकट में फंसे परिवार को राहत दिलाई। वहीं, सिरसा में कार्यरत होने के बावजूद राजेश जांगड़ा का आधी रात भिवानी पहुंचकर रक्तदान करना उनके सेवा भाव को दर्शाता है। उन्होंने अपने आराम और व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर एक मरीज की आवश्यकता को प्राथमिकता दी।

इस घटना का संदेश केवल रक्तदान तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि संकट के समय यदि लोग जिम्मेदारी के साथ एक-दूसरे की मदद करें तो मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को उपचार उपलब्ध कराने में अहम योगदान दे सकता है और उसके परिजनों को नई आशा प्रदान कर सकता है।

बौंद निवासी मरीज के लिए आधी रात को की गई यह सहायता अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग राजेश जांगड़ा के सेवा भाव और राजेश डुडेजा के सहयोग की सराहना कर रहे हैं। दोनों ने यह संदेश दिया कि मानवता की सेवा के लिए समय की कोई सीमा नहीं होती। जब किसी की जिंदगी बचाने का प्रश्न हो तो मदद के लिए बढ़ाया गया एक कदम भी बेहद मूल्यवान बन जाता है।

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