रांची: झारखंड की राजधानी रांची में संचालित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। शहर के करीब 1305 कोचिंग संस्थानों की जांच की जाएगी। इस दौरान फायर सेफ्टी, फायर एनओसी, स्वीकृत भवन नक्शा और सुरक्षा से जुड़े अन्य जरूरी मानकों की जांच होगी। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के भवन सील किए जा सकते हैं।
नगर निगम की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। शहर में कई कोचिंग सेंटर ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी पहुंचते हैं। ऐसे में आग लगने या किसी दूसरी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी की पर्याप्त व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। जांच के दौरान अधिकारियों की टीम यह देखेगी कि कोचिंग संस्थान जिस भवन में चल रहा है, उसका नक्शा संबंधित प्राधिकरण से स्वीकृत है या नहीं। भवन का इस्तेमाल स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। इसके अलावा प्रवेश और निकास मार्ग, सीढ़ियों की चौड़ाई और आपात स्थिति में बाहर निकलने के रास्तों की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जाएगा।
फायर सेफ्टी इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोचिंग संचालकों को अग्निशमन विभाग से जरूरी एनओसी और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। इससे पहले भी नगर निगम ने संस्थानों को फायर एनओसी से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए समय दिया था और नियमों की अनदेखी पर सीलिंग की चेतावनी दी थी।
कोचिंग संस्थानों में अग्निशामक यंत्र, आपात निकास और आग लगने की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के इंतजाम की जांच की जाएगी। बड़ी संख्या में छात्रों वाले भवनों में सुरक्षा व्यवस्था में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
रांची में कोचिंग संस्थानों की संख्या काफी अधिक है। प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर स्कूल और कॉलेज स्तर की पढ़ाई के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी इन संस्थानों पर निर्भर हैं। ऐसे में प्रशासन अब केवल शैक्षणिक गतिविधि नहीं बल्कि उन भवनों की सुरक्षा और वैधानिक स्थिति की भी जांच करना चाहता है जहां ये संस्थान संचालित किए जा रहे हैं।
नगर निगम की टीम जांच के दौरान संबंधित संस्थानों से जरूरी दस्तावेज मांग सकती है। जिन संस्थानों के पास निर्धारित अनुमति या फायर सेफ्टी से जुड़े दस्तावेज नहीं होंगे, उन्हें नियमों के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर भवन को सील करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। प्रशासन की सख्ती का असर ऐसे कोचिंग सेंटरों पर अधिक पड़ सकता है जो बेसमेंट, संकरी गलियों या ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार प्रवेश और निकास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए पर्याप्त रास्ता होना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा आवश्यकताओं में शामिल है।
हाल के वर्षों में देश के अलग-अलग शहरों में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में आग लगने की घटनाओं ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके बाद विभिन्न शहरों में प्रशासन ने फायर एनओसी और भवन सुरक्षा मानकों की जांच तेज की है। रांची में शुरू होने वाला अभियान भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नगर निगम की कार्रवाई से कोचिंग संचालकों पर अपने संस्थानों में जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ेगा। संचालकों को फायर सेफ्टी उपकरणों की नियमित जांच, आपात निकास को खुला रखने और विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों को आपदा की स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने की प्रक्रिया की जानकारी देने पर भी ध्यान देना होगा।
अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए भी यह अभियान महत्वपूर्ण है। कोचिंग में दाखिला लेते समय केवल पढ़ाई और फीस ही नहीं बल्कि भवन की सुरक्षा, फायर सेफ्टी और आपात निकास जैसी सुविधाओं की जानकारी लेना भी जरूरी है।
रांची नगर निगम की 1305 कोचिंग संस्थानों की जांच पूरी होने के बाद शहर में नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी। प्रशासन का संदेश साफ है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। फायर सेफ्टी और भवन नियमों की गंभीर अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ सीलिंग समेत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
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