पाकुड़। झारखंड के सीमावर्ती जिले पाकुड़ में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए प्रशासन और चुनाव आयोग के सामने गंभीर मुद्दा उठाया है।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा ने मंगलवार को परिसदन में प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान जिले में जाति प्रमाणपत्र और आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने की होड़ मची हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए तो नहीं किया जा रहा।
एक जमाबंदी पर सैकड़ों दावों का आरोप
गणेश मिश्रा ने दावा किया कि पाकुड़ जिले में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां एक ही जमाबंदी के आधार पर बड़ी संख्या में लोग स्थानीय निवासी होने का दावा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी एक जमीन रिकॉर्ड के आधार पर किसी बूथ क्षेत्र में सैकड़ों लोग अपना निवास साबित करने का प्रयास कर रहे हैं तो यह सामान्य स्थिति नहीं हो सकती।
भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि मतदाता सूची की शुद्धता बनी रहे।
SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करना होता है।
भाजपा ने इसी प्रक्रिया के दौरान प्रमाणपत्रों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है।
गणेश मिश्रा ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
प्रशासन और चुनाव आयोग से जांच की मांग
भाजपा नेता ने प्रशासन और चुनाव आयोग से मांग की कि ऐसे मामलों की जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का स्थानीय निवासी होने का दावा सही है तो उसमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन एक ही दस्तावेज के आधार पर बड़ी संख्या में दावों की जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में सही और पात्र लोगों के नाम ही शामिल होने चाहिए।
जाति और आवासीय प्रमाणपत्रों को लेकर आरोप
गणेश मिश्रा ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में जाति और आवासीय प्रमाणपत्र बनवाए जा रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि इन प्रमाणपत्रों का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है और क्या इनके जरिए मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।
सीमावर्ती जिले की संवेदनशीलता का मुद्दा
पाकुड़ एक सीमावर्ती जिला है, ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राजनीतिक दल अक्सर सवाल उठाते रहे हैं।
भाजपा ने इसी संवेदनशीलता का हवाला देते हुए प्रशासन से अतिरिक्त सावधानी बरतने की मांग की है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
भाजपा के आरोपों के बाद पाकुड़ में राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है।
हालांकि, प्रशासन या चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निष्पक्ष प्रक्रिया पर जोर
मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान सभी दावों और दस्तावेजों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि केवल योग्य और सत्यापित आवेदनों को ही स्वीकार किया जाए।