नोवामुंडी। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार आपत्तिजनक तस्वीर साझा किए जाने का मामला सामने आया है। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए सोमवार को नोवामुंडी थाने में लिखित शिकायत दी। भाजपा कार्यकर्ताओं ने दुंबी गागराई नामक व्यक्ति पर तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

भाजपा नेताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री की छवि को कथित रूप से आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया और इसके बाद तस्वीर को सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की सामग्री से प्रधानमंत्री की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई है।

हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित तस्वीर किसने तैयार की, किस अकाउंट से सबसे पहले पोस्ट की गई और इसे साझा करने में किन लोगों की भूमिका रही।

नोवामुंडी थाने में दिया लिखित आवेदन

मामले को लेकर भाजपा कार्यकर्ता सोमवार को नोवामुंडी थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों को लिखित आवेदन सौंपा। शिकायत में दुंबी गागराई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई है।

भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की छवि खराब करने या आपत्तिजनक सामग्री फैलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। विशेष रूप से एआई के जरिए तस्वीरों में बदलाव कर उन्हें वास्तविक बताकर प्रसारित करने की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय बन रही है।

पार्टी नेताओं ने मांग की कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई संबंधित सामग्री की तकनीकी जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि इसे तैयार करने और प्रसारित करने के पीछे कौन लोग शामिल थे।

SDPO और SDO को भी भेजी शिकायत की कॉपी

भाजपा कार्यकर्ताओं ने मामले को केवल स्थानीय थाने तक सीमित नहीं रखा है। लिखित शिकायत की प्रतिलिपि किरीबुरू के एसडीपीओ और जगन्नाथपुर के एसडीओ को भी भेजी गई है।

इसके जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरे मामले से अवगत कराया है। भाजपा नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सोशल मीडिया पोस्ट की जांच कराई जाए और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए।

अब पुलिस की जांच में यह देखा जा सकता है कि जिस सोशल मीडिया अकाउंट से तस्वीर साझा किए जाने का आरोप लगाया गया है, उसका संचालन कौन कर रहा था और पोस्ट कब एवं किन परिस्थितियों में की गई।

5 सितंबर को साइबर सेल में भी शिकायत

इस मामले में भाजपा की ओर से पहले भी शिकायत की जा चुकी है। जानकारी के अनुसार 5 सितंबर को भाजपा के जिला सोशल मीडिया प्रभारी रेंसो कोड़ा ने साइबर अपराध शाखा में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी।

इसके बाद सोमवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने नोवामुंडी थाने पहुंचकर लिखित आवेदन दिया। इससे स्पष्ट है कि पार्टी मामले को साइबर अपराध से जुड़े पहलुओं के साथ स्थानीय स्तर पर भी उठा रही है।

साइबर सेल की जांच में संबंधित पोस्ट का डिजिटल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी और तस्वीर से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

AI से तैयार तस्वीर को लेकर विवाद

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ तस्वीरों और वीडियो में वास्तविक जैसे बदलाव करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। एआई से तैयार या बदली गई सामग्री कई बार सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाती है। यदि ऐसी सामग्री को स्पष्ट संदर्भ के बिना साझा किया जाए तो दर्शकों के लिए वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।

प्रधानमंत्री से जुड़ी कथित तस्वीर के मामले में भी यह जांच का विषय होगा कि तस्वीर पूरी तरह एआई से तैयार की गई थी या किसी वास्तविक तस्वीर में डिजिटल बदलाव किए गए थे।

यह भी पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पोस्ट के साथ कोई कैप्शन या अन्य सामग्री साझा की गई थी या नहीं और पोस्ट को किस संदर्भ में प्रसारित किया गया।

सोशल मीडिया अकाउंट की जांच हो सकती है अहम

मामले में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिस अकाउंट से तस्वीर पोस्ट या साझा किए जाने का आरोप है, उसकी गतिविधियों और पोस्ट के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से पूरे घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।

किसी सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामले में केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मूल पोस्ट, उसके समय, अकाउंट और डिजिटल रिकॉर्ड की पुष्टि जरूरी होती है। यदि सामग्री बाद में हटा भी दी गई हो तो साइबर जांच के दौरान उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है।

शिकायत अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करती

फिलहाल भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से शिकायत दी गई है और दुंबी गागराई पर तस्वीर साझा करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत या आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं करते। आरोपों की सत्यता पुलिस और साइबर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

यदि एफआईआर दर्ज की जाती है तो जांच एजेंसी संबंधित पक्षों के बयान लेने के साथ डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

AI और डीपफेक सामग्री बनी नई चुनौती

यह मामला एआई से तैयार या परिवर्तित सामग्री के बढ़ते इस्तेमाल की ओर भी ध्यान खींचता है। राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों की तस्वीरों तथा वीडियो को डिजिटल रूप से बदलकर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले नई चुनौती बन रहे हैं।

ऐसी सामग्री कई बार व्यंग्य या रचनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में बनाई जाती है, जबकि कुछ मामलों में इसका इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने या किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के साथ सामने आता है। प्रत्येक मामले में सामग्री, संदर्भ और लागू कानून के आधार पर ही कानूनी स्थिति निर्धारित होती है।

फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित एआई तस्वीर से जुड़े मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं ने नोवामुंडी थाने से कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रतियां वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई हैं और साइबर सेल में पहले ही ऑनलाइन शिकायत की जा चुकी है। अब पुलिस और साइबर जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि तस्वीर किसने बनाई, इसे किस तरह प्रसारित किया गया और मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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