वोटर लिस्ट में विदेशी नामों का खुलासा पासपोर्ट ऑफिस ने की पुष्टि
विदेशी नागरिकों के नाम का मामला जमशेदपुर में बढ़ी हलचल
जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित तौर पर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में वोटर लिस्ट में तीन ऐसे लोगों के नाम सामने आने का दावा किया गया है, जिनकी पहचान अफगान नागरिकों के रूप में हुई है। पासपोर्ट कार्यालय से मिले दस्तावेजों के आधार पर इनकी नागरिकता को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। मामला सामने आने के बाद चुनावी सूची की शुद्धता और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम ही शामिल होने चाहिए और संदिग्ध मामलों की गहन जांच की जा रही है।
दस्तावेजों के आधार पर हुई पहचान
बताया जा रहा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान कुछ नामों और दस्तावेजों की जांच की गई। इसी दौरान संबंधित व्यक्तियों की नागरिकता को लेकर संदेह सामने आया। जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों से जानकारी मिलने के बाद मामले की पड़ताल आगे बढ़ाई गई। अधिकारियों ने दस्तावेजों के सत्यापन और रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन लोगों के नाम मतदाता सूची में किस प्रक्रिया के तहत शामिल हुए।
वोटर लिस्ट की जांच पर जोर
मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए SIR अभियान चलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत नए नाम जोड़ने, पुराने नामों के सत्यापन और संदिग्ध प्रविष्टियों की जांच की जाती है। झारखंड में भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम जुड़वाने के आरोपों की जांच के मामले सामने आए हैं। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं रहना चाहिए। यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है। मतदाता सूची में कथित विदेशी नागरिकों के नाम मिलने का मुद्दा सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष केवल आधिकारिक जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
आगे की कार्रवाई पर नजर
अब प्रशासन और चुनाव विभाग की नजर इस बात पर है कि इन नामों को वोटर लिस्ट में शामिल करने में किस स्तर पर चूक हुई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या अन्य स्थानों पर भी ऐसे संदिग्ध मामले मौजूद हैं। SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आए इस मामले ने मतदाता सूची की निगरानी और नागरिकता सत्यापन व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।