श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौजूदा स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इमरान आज उसी तरह के राजनीतिक व्यवहार का सामना कर रहे हैं, जैसा उनके शासनकाल में उनके विरोधियों के साथ हुआ था। साथ ही महबूबा ने वर्ष 1994 में लंदन में इमरान खान के साथ हुई अपनी पहली मुलाकात को भी याद किया।

महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की
राजनीति
पर लिखे एक लेख में बताया कि वह पहली बार 1994 में अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ लंदन में इमरान खान से मिली थीं। उस समय इमरान पाकिस्तान में बदलाव लाने की इच्छा और अपने राजनीतिक विचारों को लेकर काफी उत्साहित थे। महबूबा के मुताबिक उनके पिता भी इमरान के इस जुनून से प्रभावित हुए थे।
सत्ता में आने के बाद बदली तस्वीर
महबूबा ने कहा कि बदलाव का वादा करने वाले इमरान खान जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने तो उनकी सरकार भी वहां लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक संस्कृति से खुद को अलग नहीं रख पाई। उनके कार्यकाल में नवाज शरीफ और मरियम नवाज समेत विपक्ष के कई नेताओं को जेल और कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा। महबूबा के अनुसार आज परिस्थितियां पलट गई हैं और इमरान खुद उसी राजनीतिक व्यवस्था के निशाने पर हैं। उन्होंने इसे पाकिस्तान में लंबे समय से जारी सत्ता और प्रतिशोध के चक्र से जोड़ते हुए कहा कि समस्या किसी एक नेता या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां की पूरी व्यवस्था से जुड़ी हुई है।
सेना और राजनीति के रिश्तों पर उठाए सवाल
महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की राजनीति में सेना और अन्य शक्तिशाली संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान में राजनीतिक नेताओं को सत्ता हासिल करने के लिए अक्सर 'एस्टैब्लिशमेंट' के साथ तालमेल बनाना पड़ता है। लेकिन जब किसी नेता के संबंध इसी व्यवस्था से खराब होते हैं तो वही संस्थागत ताकत उसके खिलाफ इस्तेमाल होने लगती है। इमरान खान के मामले में भी उन्होंने इसी राजनीतिक चक्र की ओर इशारा किया। महबूबा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार किसकी बनेगी, इसका फैसला जनता और निष्पक्ष राजनीतिक प्रक्रिया से होना चाहिए।
इमरान की रिहाई की भी उठाई बात
इमरान खान की आलोचना करने के साथ ही महबूबा मुफ्ती ने उनकी रिहाई और निष्पक्ष राजनीतिक प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि किसी नेता के साथ राजनीतिक प्रतिशोध लोकतंत्र के लिए सही नहीं है, भले ही सत्ता में रहते हुए उस नेता ने अपने विरोधियों के साथ कैसा भी व्यवहार किया हो।
महबूबा ने क्रिकेट की भाषा का सहारा लेते हुए कहा कि पवेलियन लौटना हमेशा पारी का अंत नहीं होता। उनके मुताबिक इमरान की रिहाई और इसके बाद स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा पारदर्शी राजनीतिक प्रक्रिया पाकिस्तान में बदलाव की शुरुआत बन सकती है। करीब 32 साल पुरानी मुलाकात को याद करते हुए महबूबा ने एक तरफ इमरान खान के शुरुआती राजनीतिक जुनून का जिक्र किया तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी सरकार की कमजोरियों को भी रेखांकित किया। उनकी टिप्पणी के केंद्र में पाकिस्तान में सत्ता, सेना और राजनीतिक प्रतिशोध का वह चक्र रहा, जिसमें अलग-अलग समय पर अलग-अलग नेता फंसते रहे हैं।
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