Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: राजधानी में पुलिस और साइबर विभाग की संयुक्त कार्रवाई में नकली नोटों के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके कब्जे से नकली नोटों के साथ-साथ नकली मुद्रा बनाने के उपकरण और कच्चा सामान बरामद किया गया।
पुलिस के अनुसार, यह रैकेट पिछले कई महीनों से नकली नोटों का उत्पादन और वितरण कर रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रमेश कुमार और सौरभ वर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपी देश के विभिन्न हिस्सों में नकली नोट सप्लाई करने का काम कर रहे थे और इससे जुड़े अन्य लोग भी जल्द गिरफ्तार किए जा सकते हैं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि रैकेट के खिलाफ यह कार्रवाई साइबर और आर्थिक अपराध जांच टीम की सूचना के आधार पर की गई। अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने साइबर तकनीक और प्रिंटिंग मशीनों का उपयोग करके नोटों की नकली कॉपी तैयार की थी।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सैकड़ों हजार रुपये मूल्य के नकली नोट, प्रिंटर, लैमिनेटर और अन्य उपकरण बरामद किए। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की विस्तृत जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि यह रैकेट कितने समय से सक्रिय था और देश के किन-किन हिस्सों में नोट सप्लाई किए गए।
विशेष पुलिस अधिकारी ने कहा, “नकली नोट बनाना और उसे बाजार में फैलाना देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी और जांच आवश्यक है। हमें खुशी है कि हमने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया।”
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह भी पता चला कि रैकेट के कुछ सदस्य मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से संपर्क में थे, जिससे नोटों का वितरण और पैमाने बढ़ाया जा रहा था। पुलिस इस नेटवर्क को भी जल्द खत्म करने के लिए तकनीकी और फील्ड जांच कर रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि नकली नोटों का प्रसार मुद्रा और वित्तीय प्रणाली में विश्वास को कमजोर करता है और इसे रोकने के लिए कानून और साइबर तकनीक का संयोजन महत्वपूर्ण है।
पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि यदि किसी को संदिग्ध नोट या नकली मुद्रा के मामलों की जानकारी है तो वह तुरंत संबंधित थाने या साइबर हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें। यह कदम नकली नोटों के कारोबार को रोकने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने में मदद करेगा।
इस गिरफ्तारी ने यह साबित किया कि पुलिस और साइबर टीम की सक्रियता और समन्वय से ऐसे बड़े रैकेटों का पर्दाफाश किया जा सकता है। अधिकारी आश्वस्त हैं कि आगे की जांच में रैकेट के अन्य सदस्य और नेटवर्क का भी पता लगाया जाएगा, ताकि पूरे शहर और आसपास के इलाकों में नकली नोटों की आपूर्ति रोकी जा सके।