हिमाचल : आईआईटी मंडी (IIT Mandi) में भगवद गीता पर आधारित एक विवादित पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संस्थान परिसर में लगाए गए इस पोस्टर में शूद्रों को लेकर एक कथित टिप्पणी की गई थी, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
विवाद बढ़ने के बाद IIT मंडी प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने इस पोस्टर को लेकर सफाई देते हुए कहा कि यह छात्रों द्वारा धार्मिक ग्रंथ की अपनी समझ के आधार पर तैयार किया गया था और इससे उनका व्यक्तिगत रूप से कोई संबंध नहीं है।
पोस्टर में लिखी टिप्पणी पर विवाद
जानकारी के अनुसार, IIT मंडी परिसर में लगाए गए पोस्टर में भगवद गीता के संदर्भ में शूद्रों को लेकर एक टिप्पणी की गई थी।
पोस्टर में कथित तौर पर कहा गया था कि शूद्रों को “उच्च वर्गों की सेवा” करनी चाहिए। इस संदेश के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और छात्र समुदाय के बीच बहस शुरू हो गई।
कई लोगों ने इसे सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे धार्मिक ग्रंथ की व्याख्या से जुड़ा विषय बताया।
संस्थान ने शुरू की जांच
विवाद सामने आने के बाद IIT मंडी प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
संस्थान यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि पोस्टर किसने लगाया, इसका उद्देश्य क्या था और इसे लगाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी।
प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निदेशक ने पोस्टर से खुद को अलग किया
IIT मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि पोस्टर छात्रों द्वारा भगवद गीता की अपनी समझ के आधार पर तैयार किया गया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस पोस्टर या उसमें लिखी गई बातों से जुड़े नहीं हैं।
बेहरा ने कहा कि छात्रों को किसी भी विषय को समझने और चर्चा करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रस्तुति में संस्थान की आधिकारिक स्थिति नहीं मानी जानी चाहिए।
गीता पाठ्यक्रम से जुड़े हैं निदेशक
प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा का भगवद गीता के अध्ययन और उससे जुड़े विषयों से लंबे समय से संबंध रहा है।
वे IIT मंडी में भगवद गीता पर आधारित तीन क्रेडिट का कोर्स भी पढ़ाते हैं।
इसके अलावा वे प्रस्तावित ‘भक्तिवेदांत’ से जुड़े एक संस्थान के संस्थापक भी बताए जाते हैं।
उनकी आध्यात्मिक विषयों में रुचि को देखते हुए इस मामले में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने पोस्टर से खुद को अलग किया।
छात्रों की अभिव्यक्ति और संस्थान की जिम्मेदारी पर बहस
इस विवाद ने उच्च शिक्षण संस्थानों में धार्मिक, सामाजिक और वैचारिक विषयों पर चर्चा की सीमाओं को लेकर बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में विचारों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन ऐसी सामग्री से बचना चाहिए जो किसी समुदाय या वर्ग के प्रति भेदभाव को बढ़ावा देने वाली लगे।
सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया
पोस्टर की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।
कुछ लोगों ने इसे धार्मिक ग्रंथ की गलत व्याख्या बताया, जबकि कुछ ने इसे छात्रों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का मामला बताया।
मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
जांच रिपोर्ट के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
फिलहाल IIT मंडी प्रशासन की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि पोस्टर किस उद्देश्य से लगाया गया था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
संस्थान का कहना है कि वह परिसर में ऐसा माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां सभी छात्रों को सम्मान और समान अवसर मिले।
IIT मंडी का यह मामला अब धार्मिक व्याख्या, छात्र अभिव्यक्ति और संस्थागत जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।