जड़ी-बूटी उत्पादकों को मिलेगा बाजार, तीन कंपनियों से करार
हिमाचल में जड़ी-बूटी खेती को नई दिशा, तीन कंपनियों से हुआ करार
शिमला: हिमाचल के पहाड़ी खेतों में उगने वाली औषधीय जड़ी-बूटियों को अब सीधे बाजार मिलेगा। किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य मेडिसिनल प्लांट बोर्ड, आयुष विभाग ने तीन किसानों और तीन औषधि कंपनियों के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन किए हैं। ये समझौते हाल ही में शिमला में आयोजित राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस कार्यक्रम के दौरान किए गए। समझौते की अवधि तीन वर्ष रखी गई है।
समझौते के तहत किसान अतिश, कुटकी, करू, सुगंधवाला, कालाजीरा, चुखरी, पहाड़ी लहसुन, सालम पाईया सहित अन्य औषधीय जड़ी-बूटियां सीधे संबंधित कंपनियों को बेच सकेंगे। कंपनियां तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार उत्पाद खरीदेंगी और किसानों को सीधे भुगतान करेंगी। कंपनियां किसानों के लिए सुविधाजनक स्थान से अपने खर्च पर उत्पाद उठाएंगी।
शिमला जिले के चिडग़ांव निवासी कृपाल सिंह का करार सोलन के एमएस करण सिंह वैद्य के साथ हुआ है। उनकी त्रिदेव औषधि फार्मर सोसायटी से करीब 500 किसान जुड़े हैं। ये किसान चीढ़गांव से डोडराक्वार तक करीब 100 हेक्टेयर जमीन में चौराह, कुटकी, अतिश, करू, मधमेधा, सुगंधवाला, जड़धूप और चुखरी सहित औषधीय पौधों का संरक्षण और खेती करते हैं। सोसायटी का वर्तमान कारोबार सालाना करीब 10 से 15 लाख रुपये बताया गया है। सीधे कंपनी को बिक्री से कारोबार बढ़ने की संभावना है।
चंबा जिले के तीसा क्षेत्र के लोभी राम का एमिल फार्मास्यूटिकल इंडिया लिमिटेड के साथ करार हुआ है। उनके साथ 30 से 40 किसान जुड़े हैं, जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कुटकी, अतिश, जंगली लहसुन, सालम पाईया, कुठ और चौराह की खेती और संरक्षण कर रहे हैं।
लाहौल-स्पीति के टोग चंद ठाकुर का करार श्री धनवंतरी हर्बल प्राइवेट लिमिटेड, बद्दी के साथ हुआ है। वह 20 से 25 बीघा क्षेत्र में औषधीय जड़ी-बूटियां उगा रहे हैं और आने वाले समय में क्षेत्र को दो से तीन हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना है। यहां कुठ, मनु, बनककड़ी, कुटकी, गुगल धूप, चुरा, गुलाबजल, कालाजीरा, चुली, चुखरी और सुगंध जैसी जड़ी-बूटियों की खेती की जा रही है।
एमओयू के तहत राज्य मेडिसिनल प्लांट बोर्ड किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और अच्छी कृषि व संग्रहण पद्धतियों का प्रशिक्षण देगा। जड़ी-बूटियों की कीमत बुवाई से पहले तय आधार मूल्य या प्रचलित बाजार मूल्य के अनुसार तय होगी। गुणवत्ता पर विवाद होने पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में संयुक्त नमूना परीक्षण का प्रावधान भी रखा गया है।