हिमाचल प्रदेश : ऊना जिले में शुरू हुई इलेक्ट्रिक बस सेवा ने एक महीने का सफर पूरा कर लिया है। पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक परिवहन सुविधा के रूप में शुरू की गई इस सेवा को यात्रियों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
दो अगस्त से शुरू हुए इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के बाद एक महीने में इन बसों से करीब 27 लाख रुपये की आय दर्ज की गई है। स्थानीय रूटों के साथ-साथ लंबी दूरी के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर भी अब यात्रियों को सफर का नया विकल्प मिल गया है।
35 इलेक्ट्रिक बसों का हो रहा संचालन
ऊना जिले को कुल 35 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें ऊना ई-डिपो की 12 बसें और हरोली ई-डिपो की 23 बसें शामिल हैं।
इन बसों को अलग-अलग रूटों पर संचालित किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल रही है।
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जहां यात्रियों को आरामदायक सफर मिल रहा है, वहीं प्रदूषण कम करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एम्स बिलासपुर और मुद्रिका रूट को मिली अच्छी प्रतिक्रिया
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की ओर से शुरू किए गए नए रूटों में एम्स बिलासपुर और मुद्रिका रूट प्रमुख हैं।
इन रूटों पर यात्रियों की शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक बताई जा रही है। खासकर एम्स बिलासपुर जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह सेवा काफी उपयोगी साबित हो रही है।
अब लोगों को उपचार के लिए बिलासपुर पहुंचने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल रही है।
चंडीगढ़ जाने वाले यात्रियों को भी राहत
इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने से चंडीगढ़ जाने वाले यात्रियों को भी एक अतिरिक्त विकल्प मिला है।
सुबह जल्दी यात्रा करने वाले यात्रियों और नौकरी, शिक्षा या अन्य जरूरी कामों से चंडीगढ़ जाने वाले लोगों को इससे सुविधा हो रही है।
बस सेवा के विस्तार से यात्रियों को समय पर और आरामदायक परिवहन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
आय के आंकड़े उत्साहजनक
एक महीने में करीब 27 लाख रुपये की आय होना इलेक्ट्रिक बस सेवा के लिए शुरुआती तौर पर अच्छा संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नए रूट की वास्तविक सफलता का आकलन लंबे समय तक संचालन और यात्रियों की लगातार संख्या के आधार पर ही किया जा सकेगा।
नए रूटों की उपयोगिता और आर्थिक स्थिति का सही मूल्यांकन आने वाले समय में यात्रियों की संख्या और आय के आधार पर होगा।
पर्यावरण के लिए भी अहम कदम
इलेक्ट्रिक बसों का संचालन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है।
डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें कम प्रदूषण करती हैं और ईंधन की बचत में भी मददगार साबित होती हैं।
सरकार और परिवहन विभाग का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
यात्रियों को मिल रही बेहतर सुविधा
इलेक्ट्रिक बसों में सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि ये बसें आरामदायक और सुविधाजनक हैं।
नई तकनीक वाली इन बसों से सफर का अनुभव बेहतर हुआ है। साथ ही, शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी भी मजबूत हुई है।
आगे बढ़ाई जा सकती है सेवा
इलेक्ट्रिक बसों को मिल रही प्रतिक्रिया को देखते हुए आने वाले समय में नए रूटों पर भी इनके संचालन की संभावना जताई जा रही है।
परिवहन निगम यात्रियों की जरूरत और रूट की मांग के आधार पर आगे की योजना तैयार करेगा।
ऊना जिले में इलेक्ट्रिक बस सेवा का पहला महीना सकारात्मक परिणामों के साथ पूरा हुआ है। अब आने वाले महीनों में यात्रियों की संख्या और आय के आधार पर इस सेवा की वास्तविक सफलता का आकलन किया जाएगा।