फरीदाबाद। ओल्ड फरीदाबाद स्थित बराही तालाब पार्क में मंदिर हटाने पहुंची नगर निगम की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों के भारी विरोध के कारण निगम कर्मचारियों को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के कर्मचारी गुरुवार को मंदिर से भगवान हनुमान जी की मूर्ति उठाकर ले गए थे। इसके बाद शुक्रवार शाम को निगम की टीम मंदिर को हटाने और तोड़फोड़ की कार्रवाई करने के लिए पहुंची। जैसे ही लोगों को इसकी जानकारी मिली, वे मौके पर एकत्र हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।

स्थानीय निवासी अनुज शर्मा ने बताया कि करीब 30 साल पहले इस स्थान पर नगर निगम कर्मचारियों का एक स्टोर हुआ करता था। बाद में निगम ने अपना स्टोर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। इसके बाद बराही तालाब पार्क में सुबह-शाम घूमने आने वाले स्थानीय लोगों ने खाली पड़ी जगह पर एक छोटा सा मंदिर बना दिया था।

उन्होंने बताया कि यह मंदिर पिछले कई वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ था। पार्क में आने वाले लोग सुबह पूजा-अर्चना करते थे और धार्मिक भावनाओं से जुड़े रहते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर किसी व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं बनाया गया था, बल्कि लोगों की आस्था और सुविधा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था।

लोगों का आरोप है कि निगम प्रशासन ने बिना स्थानीय लोगों को जानकारी दिए मंदिर से मूर्ति हटाने की कार्रवाई की। इसके बाद जब निगम की टीम मंदिर तोड़ने पहुंची तो लोगों ने इसका विरोध किया। स्थानीय लोगों ने कहा कि धार्मिक स्थल से जुड़ी किसी भी कार्रवाई से पहले बातचीत और उचित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

मौके पर पहुंचे लोगों ने निगम की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने मांग की कि मंदिर को हटाने से पहले प्रशासन को स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझना चाहिए और कोई भी फैसला बातचीत के बाद लिया जाना चाहिए।

विरोध के बाद निगम की टीम ने स्थिति को देखते हुए मौके से वापस लौटने का फैसला किया। हालांकि, इस दौरान स्थानीय लोगों और निगम कर्मचारियों के बीच काफी देर तक बातचीत भी हुई। लोगों ने प्रशासन से इस मामले में उचित समाधान निकालने की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बराही तालाब पार्क क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग सुबह और शाम घूमने आते हैं। मंदिर होने से लोगों को धार्मिक और सामाजिक जुड़ाव भी महसूस होता है। उनका कहना है कि इतने वर्षों से मौजूद मंदिर को अचानक हटाने की कार्रवाई उचित नहीं है।

वहीं, नगर निगम की ओर से इस मामले में अभी विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, निगम प्रशासन समय-समय पर सरकारी जमीन और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, किसी भी निर्माण या धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। हालांकि, स्थानीय लोगों के विरोध के बाद अब इस मामले में आगे की रणनीति पर विचार किया जा सकता है।

घटना के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग मंदिर को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाएगा, इस पर सभी की नजर है।

बराही तालाब मंदिर विवाद ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर बने धार्मिक स्थलों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले संवाद जरूरी है, ताकि विवाद की स्थिति न बने।

फिलहाल निगम की टीम के लौटने के बाद स्थिति शांत है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

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