चंडीगढ़। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में कचरा संग्रहण व्यवस्था को बेहतर बनाने और लोगों की शिकायतों का तेजी से समाधान करने के लिए सभी शहरी निकायों में वार्ड समितियों का गठन कर दिया गया है। नागरिक अब कचरा उठान से संबंधित अपनी शिकायत इन समितियों के व्हाट्सएप नंबर पर दर्ज करा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य शिकायत मिलने के बाद उसका जल्द समाधान सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में शत-प्रतिशत कचरा उठान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए घर-घर जीपीएस आधारित कचरा संग्रहण वाहन पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को शहरी स्थानीय निकायों में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, कचरा संग्रहण वाहनों की रूट मैपिंग, आवश्यक मशीनरी की उपलब्धता, पोर्टल के माध्यम से भुगतान, वार्ड समितियों के गठन और स्वच्छता पखवाड़ा कैलेंडर सहित कई विषयों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान और पंजीकरण के साथ-साथ स्वच्छता के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों की मैपिंग और उनके साथ समझौता ज्ञापन यानी एमओयू की स्थिति की भी समीक्षा की। सरकार की योजना शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और उसकी निगरानी को मजबूत बनाने की है।

नई व्यवस्था में वार्ड समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रत्येक शहरी निकाय में गठित समितियां अपने संबंधित वार्ड में कचरा संग्रहण से जुड़ी शिकायतों पर नजर रखेंगी। अगर किसी क्षेत्र में समय पर कचरा नहीं उठाया जाता है या कचरा संग्रहण वाहन नियमित रूप से नहीं पहुंचता है तो स्थानीय निवासी समिति के व्हाट्सएप नंबर पर इसकी शिकायत कर सकेंगे।

इस व्यवस्था से लोगों को शिकायत दर्ज कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। व्हाट्सएप के जरिए शिकायत मिलने के बाद संबंधित टीम तक जानकारी पहुंचाई जाएगी और समस्या का समाधान कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वार्ड स्तर पर व्यवस्था होने से स्थानीय समस्याओं की पहचान और उनके समाधान में तेजी आने की उम्मीद है।

राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में घर-घर कचरा संग्रहण को भी अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए जीपीएस आधारित कचरा संग्रहण वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा। जीपीएस तकनीक की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि संबंधित वाहन निर्धारित मार्ग पर गया या नहीं और किन क्षेत्रों में कचरा संग्रहण किया गया।

रूट मैपिंग के माध्यम से प्रत्येक वाहन के लिए निर्धारित क्षेत्र और मार्ग तय किए जाएंगे। इससे कचरा संग्रहण वाहनों की गतिविधियों की निगरानी आसान होगी। किसी क्षेत्र में वाहन नहीं पहुंचने की शिकायत मिलने पर संबंधित रिकॉर्ड के जरिए इसकी जांच भी की जा सकेगी। सरकार का लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में शत-प्रतिशत घरों तक कचरा संग्रहण सेवा पहुंचाना है।

बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए उपलब्ध मशीनरी की स्थिति पर भी चर्चा की गई। शहरों में कचरा उठाने, उसके परिवहन और निस्तारण के लिए पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता जरूरी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से मौजूदा संसाधनों और आवश्यक मशीनरी की जानकारी ली।

इसके साथ ही कचरा प्रबंधन से जुड़े भुगतान को पोर्टल के माध्यम से करने की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। डिजिटल प्रणाली के इस्तेमाल से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार कचरा प्रबंधन के विभिन्न चरणों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

स्वच्छता पखवाड़ा कैलेंडर भी समीक्षा बैठक का प्रमुख विषय रहा। इसके तहत अलग-अलग समय पर स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियों और अभियानों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संचालित करने की योजना है। शहरी निकायों को अपने क्षेत्रों में नियमित सफाई के साथ विशेष स्वच्छता गतिविधियों पर भी ध्यान देना होगा।

मुख्यमंत्री ने बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान और पंजीकरण की प्रगति की भी समीक्षा की। बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों, प्रतिष्ठानों और अन्य इकाइयों को कचरा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने के लिए उनकी पहचान और पंजीकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बड़े स्तर पर पैदा होने वाले कचरे के व्यवस्थित प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।

सरकार स्वच्छता अभियान में गैर सरकारी संगठनों की भागीदारी को भी बढ़ाने की तैयारी में है। इसी उद्देश्य से एनजीओ की मैपिंग और उनके साथ एमओयू की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इससे स्वच्छता जागरूकता, कचरा प्रबंधन और नागरिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर सहयोग बढ़ाया जा सकेगा।

हरियाणा सरकार की नई व्यवस्था में तकनीक और स्थानीय स्तर की निगरानी दोनों पर जोर दिया गया है। एक तरफ जीपीएस आधारित वाहनों और रूट मैपिंग से कचरा संग्रहण की निगरानी की जाएगी, वहीं दूसरी तरफ वार्ड समितियों के जरिए नागरिकों को सीधे शिकायत दर्ज कराने का माध्यम मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में कचरा संग्रहण को नियमित बनाते हुए शत-प्रतिशत घरों को इस व्यवस्था से जोड़ना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की समीक्षा बैठक के बाद संबंधित विभागों और शहरी निकायों से इन व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की अपेक्षा की गई है। वार्ड समितियों और जीपीएस आधारित कचरा संग्रहण प्रणाली के जरिए अब शहरों में सफाई व्यवस्था की निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी है।

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