सोनीपत: हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई के कुलपति अशोक कुमार के सम्मान में शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में विदाई समारोह आयोजित किया गया। इसमें अधिकारियों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके कार्यकाल के दौरान किए गए योगदान को याद किया।

अशोक कुमार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक मामले के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। शुक्रवार को आयोजित समारोह की शुरुआत एक सहायक प्रोफेसर द्वारा विश्वविद्यालय में अपने अनुभव साझा करने के साथ हुई। उन्होंने सहायक प्रोफेसर पदों पर हुई चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बताते हुए कुलपति के नेतृत्व और कार्यशैली की सराहना की। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। खेल कोचिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा के विद्यार्थियों ने भी उनके मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार जताया।

कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने हासिल कीं कई उपलब्धियां

समारोह में अशोक कुमार के कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इनमें मिशन ओलंपिक्स 2036 सम्मेलन का आयोजन, भारतीय विश्वविद्यालय संघ से संबद्धता, विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता और राष्ट्रीय खेल संस्थान की समकक्षता हासिल करना शामिल है।

वक्ताओं ने बताया कि शारीरिक शिक्षा एवं खेल के क्षेत्र में विद्यार्थी संख्या के आधार पर विश्वविद्यालय देश का दूसरा सबसे बड़ा संस्थान बनकर उभरा। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय में 30 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

आईआईटी दिल्ली से शिक्षा, आईपीएस के रूप में भी दी सेवाएं

वक्ताओं ने अशोक कुमार के शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली से तकनीकी शिक्षा प्राप्त की और भारतीय पुलिस सेवा में अपनी सेवाएं दीं। वह उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्हें हरियाणा खेल विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके अनुभव ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक विकास को दिशा देने में योगदान दिया।

विद्यार्थियों को सिखाने के साथ खुद भी बहुत कुछ सीखा: अशोक कुमार

अपने संबोधन में अशोक कुमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों और कर्मचारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को सिखाने के साथ-साथ उन्होंने स्वयं भी बहुत कुछ सीखा है। हरियाणा सरकार ने उन्हें इस संस्थान की कार्यशैली समझने और नई व्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर दिया, जिसके लिए वह आभारी हैं।

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