Raipur. रायपुर। विद्यार्थियों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने, साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी देने और पुलिस तथा आमजन के बीच विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से रायपुर पुलिस कमिश्नरेट (नॉर्थ जोन) द्वारा संचालित "संवाद से समाधान" अभियान के तहत मंगलवार को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मोवा में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और नए आपराधिक कानूनों, साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा, यातायात नियमों तथा आपातकालीन हेल्पलाइन सेवाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
यह कार्यक्रम पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन पुलिस उपायुक्त (उत्तर) दीपमाला कश्यप के निर्देशन में हुआ। इस अवसर पर सहायक पुलिस आयुक्त पंडरी कृष्ण कुमार चंद्राकर, थाना प्रभारी पंडरी परेश पांडे सहित विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में पुलिस उपायुक्त (उत्तर) दीपमाला कश्यप ने विद्यार्थियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की प्रमुख विशेषताओं की सरल भाषा में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए आपराधिक कानून न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, त्वरित और पीड़ित-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कानून का सम्मान करने, अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने तथा मोबाइल और इंटरनेट का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की।
कार्यक्रम में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग लिंक, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसे साइबर अपराधों से बचने के तरीके बताए। साथ ही किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने और आपात स्थिति में डायल-112 का उपयोग करने की जानकारी भी दी गई।
सहायक पुलिस आयुक्त कृष्ण कुमार चंद्राकर ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनाने, अनुशासित जीवन जीने और नशे से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज का जागरूक युवा ही सुरक्षित और सशक्त समाज की सबसे बड़ी ताकत है। यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अपराध की जानकारी मिले तो बिना डर के तत्काल पुलिस को सूचित करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की भी विस्तार से जानकारी दी गई। छात्राओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और उपलब्ध हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जागरूक किया गया। इसके अलावा यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग तथा नाबालिग अवस्था में वाहन नहीं चलाने के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।
यह कार्यक्रम संवादात्मक शैली में आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने नए कानूनों, पुलिस व्यवस्था, साइबर सुरक्षा और महिला सुरक्षा से जुड़े कई सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने सभी प्रश्नों का सरल और व्यवहारिक उत्तर देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। साथ ही उन्हें जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने, सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग करने और कानून का सम्मान करने की प्रेरणा दी। विद्यालय के प्राचार्य मंगेश कुमार कुलकर्णी ने रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में कानूनी जागरूकता, आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि नए आपराधिक कानूनों का पालन करें, साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस, डायल-112 या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें। पुलिस का मानना है कि जागरूक नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही सुरक्षित, सशक्त और अपराधमुक्त समाज का निर्माण संभव है।
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