सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में ब्रॉडबैंड बिल में सुधार की मांग की
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Raipur. रायपुर। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस हफ्ते संसद में केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ब्रॉडबैंड सेवा के बिल का निर्धारण बिजली की तरह किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे बिजली कट जाने पर मीटर की रीडिंग बंद हो जाती है और उस अवधि का शुल्क उपभोक्ता से नहीं लिया जाता, वैसे ही इंटरनेट सेवा न मिलने पर भी मासिक शुल्क वसूली से छूट दी जानी चाहिए या रिफंड किया जाना चाहिए। अग्रवाल ने यह भी कहा कि अधिकांश इंटरनेट सेवा प्रदाता मासिक आधार पर एकमुश्त शुल्क लेते हैं। यदि उस अवधि में तकनीकी समस्याओं या नेटवर्क आउटेज की वजह से इंटरनेट सेवा उपभोक्ता को उपलब्ध नहीं होती, तब भी उपभोक्ता से पूरा शुल्क वसूला जाता है। उनका मानना है कि यह उपभोक्ता हितों के खिलाफ है और इसमें सुधार की आवश्यकता है।
सांसद अग्रवाल ने कहा कि डिजिटल युग में इंटरनेट सेवा जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है और व्यवसाय, शिक्षा और घरेलू कामकाज सभी इसमें निर्भर हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को दोषपूर्ण या अनुपलब्ध सेवा के लिए भुगतान करने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रस्तावित किया कि इंटरनेट बिलिंग प्रणाली में ऐसी व्यवस्था लागू हो कि सेवा बाधित होने पर बिल में कटौती या रिफंड स्वतः हो। अग्रवाल ने इस पहल को उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और डिजिटल सेवा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि इससे ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा और सेवा प्रदाताओं को गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रेरणा मिलेगी। सांसद के अनुसार यह बदलाव बिजली बिल जैसी पारदर्शी और न्यायसंगत प्रणाली अपनाने का अवसर है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि उपभोक्ता अधिकारों को ध्यान में रखते हुए ब्रॉडबैंड सेवा में बिलिंग सुधार लागू किया जाए।