Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सब इंस्पेक्टर (रेडियो) पद पर कार्यरत चार पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति के लिए निर्धारित आठ वर्ष की अर्हकारी सेवा की गणना वास्तविक ज्वाइनिंग तारीख से नहीं, बल्कि उस कैलेंडर वर्ष से की जाएगी, जिसमें कर्मचारी ने फीडर कैडर में नियुक्ति ली है। यह मामला ओम प्रकाश देवांगन, धर्मेश कुमार साहू, अपराजिता सिंह राणा और गौरव शुक्ला की ओर से दायर रिट अपील से जुड़ा था। सभी अधिकारियों की नियुक्ति वर्ष 2017 में सब इंस्पेक्टर (रेडियो) के पद पर हुई थी और उन्होंने नवंबर 2017 में सेवा ज्वाइन की थी। छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2021 के अनुसार सब इंस्पेक्टर (रेडियो) से इंस्पेक्टर (रेडियो) पद पर पदोन्नति के लिए आठ वर्ष की अर्हकारी सेवा निर्धारित है।
पदोन्नति की गणना को लेकर था विवाद
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) के अनुसार अर्हकारी सेवा की गणना उस कैलेंडर वर्ष से की जानी चाहिए, जिसमें कर्मचारी फीडर कैडर में नियुक्त हुआ है। उनका तर्क था कि वर्ष 2017 को पहला सेवा वर्ष मानते हुए 2018 दूसरा, 2019 तीसरा और इसी क्रम में वर्ष 2024 में उनकी आठ वर्ष की सेवा पूरी हो गई थी। इसलिए वे 1 जनवरी 2025 से इंस्पेक्टर (रेडियो) पद पर पदोन्नति के लिए पात्र थे। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि इंस्पेक्टर (रेडियो) के सात पद रिक्त थे और वरिष्ठता सूची के आधार पर वे पदोन्नति के दायरे में आते थे।
एकल पीठ के आदेश को दी थी चुनौती
इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 10 अक्टूबर 2025 के आदेश में उनकी याचिका खारिज कर दी थी। एकल पीठ ने माना था कि वास्तविक ज्वाइनिंग तारीख के आधार पर उनकी आठ वर्ष की सेवा अक्टूबर 2025 में पूरी होगी और वे 1 जनवरी 2026 से पदोन्नति के लिए पात्र होंगे। इस आदेश के खिलाफ चारों अधिकारियों ने डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की। अपील में अधिवक्ता सौरभ साहू ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता एसएस बघेल ने पैरवी की।
हाईकोर्ट ने कैलेंडर वर्ष को माना आधार
डिवीजन बेंच ने नियम 6(2) की व्याख्या करते हुए कहा कि नियमों में स्पष्ट रूप से अर्हकारी सेवा की गणना उस कैलेंडर वर्ष से करने का प्रावधान है, जिसमें कर्मचारी ने फीडर कैडर में प्रवेश किया है। अदालत ने कहा कि नवंबर 2017 में सेवा में शामिल होने वाले अधिकारियों के लिए वर्ष 2017 को पहला वर्ष माना जाएगा। इसके बाद वर्ष 2024 तक उनकी आठ वर्ष की अर्हकारी सेवा पूरी हो जाती है। इस आधार पर वे 1 जनवरी 2025 से पदोन्नति के लिए विचार योग्य हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि वास्तविक ज्वाइनिंग तारीख को आधार बनाकर पदोन्नति टालना नियमों के अनुरूप नहीं है, क्योंकि नियमों में कैलेंडर वर्ष को आधार बनाया गया है।
विभागीय पदोन्नति समिति के सामने रखने के निर्देश
डिवीजन बेंच ने यह भी माना कि रिक्त पदों और अधिकारियों की वरिष्ठता को देखते हुए उनके मामलों को विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष रखा जाना चाहिए था। अदालत ने 10 अक्टूबर 2025 के एकल पीठ के आदेश को निरस्त करते हुए रिट अपील स्वीकार कर ली। राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि चारों अधिकारियों के मामलों पर इंस्पेक्टर (रेडियो) पद पर पदोन्नति के लिए विचार किया जाए। हालांकि पदोन्नति अन्य सभी पात्रता शर्तों, रिक्तियों और विभागीय नियमों के अधीन होगी। अदालत ने नियमानुसार परिणामी लाभ देने के निर्देश भी दिए हैं।
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