नीलगाय के शिकार में चार गिरफ्तार, डॉग स्क्वॉड की मदद से पकड़े गए आरोपी
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Dhamtari. धमतरी। धमतरी जिले के वन क्षेत्र में नीलगाय के शिकार का मामला सामने आया है, जिसमें चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक बाप-बेटे भी शामिल हैं। वन विभाग ने आरोपियों तक पहुँचने के लिए डॉग स्क्वॉड की मदद ली और शिकार तीर-कमान से किया गया था। घटना धमतरी जिले के वन परिक्षेत्र केरेगांव के बांसीखाई बीट के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 121 में हुई। जंगल में लगभग 3 से 4 वर्ष की एक नर नीलगाय मृत अवस्था में पाई गई। मृत नीलगाय के शरीर के गर्दन, पेट और पिछले हिस्से में तीर लगे हुए थे, जिससे प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नीलगाय का शिकार अवैध रूप से किया गया है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी और वन अमला तुरंत मौके पर पहुंचे और शिकारियों की तलाश शुरू की। आरोपी तक पहुँचने के लिए धमतरी प्रशासन ने उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, गरियाबंद से डॉग स्क्वॉड बुलाया। डॉग स्क्वॉड ने मृत नीलगाय में लगे तीर की गंध को ट्रैक करते हुए आरोपी मन्नू पिता लहर सिंह, निवासी ग्राम डोकाल के घर तक पहुँचाया। इस प्रक्रिया के बाद मन्नू द्वारा नीलगाय का शिकार किए जाने की पुष्टि हुई। मन्नू और अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार रोकने के लिए धमतरी जिला प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। वन्य प्राणियों के अवैध शिकार और वन अपराधों की रोकथाम हेतु वन अमला और वनमंडल स्तर पर गठित उड़नदस्ता स्ट्राइक फोर्स लगातार सक्रिय हैं। इसके अलावा गुप्तचरों और सूचना तंत्र के माध्यम से भी अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। धमतरी के डीएफओ ने नागरिकों से अपील की है कि वे वन क्षेत्रों में इस तरह के अपराधों की जानकारी तुरंत वन परिक्षेत्र कार्यालय या रेंजर स्टाफ को दें। सूचना देने वाले का नाम पूर्णतः गुप्त रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और आम लोगों के सहयोग से ही अवैध शिकार जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
वन विभाग ने यह भी बताया कि डॉग स्क्वॉड का इस्तेमाल वन्य अपराधों की त्वरित जांच और अपराधियों की पहचान में बहुत प्रभावी साबित हो रहा है। इसके माध्यम से अब तक कई अवैध शिकारियों को पकड़कर न्यायालय में पेश किया जा चुका है। वन्यजीव संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा नियमित रूप से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के तहत ग्रामीणों और जंगलों के आस-पास रहने वाले नागरिकों को वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की जानकारी दी जाती है और उन्हें अवैध शिकार से रोकने की चेतावनी दी जाती है। इस घटना से वन्यजीवों के अवैध शिकार के प्रति ग्रामीण और आम जनता में चेतना बढ़ाने की आवश्यकता और भी स्पष्ट हो गई है। वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि जिले में ऐसे अपराधों पर लगातार कड़ी नजर रखी जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।