CG: हाईकोर्ट ने हेडमास्टर पदोन्नति आदेश पर लगाई रोक

छग

Update: 2026-04-10 11:23 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बस्तर संभाग में जारी हेडमास्टर पदोन्नति से जुड़े आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश 23 मार्च 2026 को जारी किया गया था, जिस पर अदालत ने शुरुआती तौर पर गंभीर त्रुटियां पाई हैं। कोर्ट का मानना है कि यह पदोन्नति आदेश उन नियमों के आधार पर जारी किया गया था जिन्हें वर्ष 2019 में पहले ही निरस्त किया जा चुका है, जबकि राज्य में नई पदोन्नति नियमावली 13 फरवरी 2026 से लागू हो चुकी थी। इस मामले को लेकर दुर्गेश कुमार कश्यप सहित अन्य शिक्षकों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आदेश को चुनौती दी थी।

मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि पदोन्नति आदेश कानून के अनुसार सही नहीं है, क्योंकि इसे पुराने नियमों के तहत जारी किया गया है, जबकि वर्तमान में लागू 2026 की नियमावली के अनुसार पदोन्नति के लिए TET परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। याचिका में यह भी कहा गया कि जिन शिक्षकों को पदोन्नति दी गई है, वे TET योग्य नहीं हैं, इसलिए पूरी प्रक्रिया नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश को RTE Act, NCTE विनियम और सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले के विपरीत बताया गया।

जिसमें स्पष्ट किया गया है कि TET के बिना पदोन्नति का कोई अधिकार नहीं बनता। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पदोन्नति आदेश के संचालन और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। कोर्ट के इस स्टे के बाद अब हेडमास्टर पदोन्नति प्रक्रिया पर अस्थिरता की स्थिति बन गई है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग रखी है कि भविष्य में सभी पदोन्नति प्रक्रियाएं नई 2026 नियमावली और NCTE के मानकों के अनुसार ही दोबारा से संचालित की जाएं, ताकि किसी प्रकार की कानूनी विसंगति न रहे।
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