Bijapur. बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में माओवादियों द्वारा पूर्व में लगाए गए प्रेशर आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) एक बार फिर आम लोगों के लिए खतरा बनकर सामने आए हैं। बुधवार को उसूर थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग घटनाओं में दो नाबालिग प्रेशर आईईडी विस्फोट की चपेट में आकर घायल हो गए। इनमें एक सुकमा जिले से नीलम सराई जलप्रपात घूमने आए पर्यटक दल का सदस्य है, जबकि दूसरा ग्रामीण जंगल में मवेशी चराने के दौरान विस्फोटक पर पैर पड़ने से घायल हो गया। दोनों घटनाओं के बाद सुरक्षा बलों और पुलिस ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार पहली घटना उस समय हुई जब सुकमा जिले के चिंतागुफा थाना क्षेत्र के ग्राम करीगुण्डम से 7-8 युवकों और नाबालिगों का एक समूह प्रसिद्ध नीलम सराई जलप्रपात घूमने आया था। बताया गया कि जलप्रपात से लगभग डेढ़ किलोमीटर पहले रास्ते में माओवादियों द्वारा पहले से लगाए गए प्रेशर आईईडी पर 13 वर्षीय सोढ़ी देवा, पिता हुंगा सोढ़ी, का पैर पड़ गया। इसके बाद जोरदार विस्फोट हुआ, जिसमें नाबालिग गंभीर रूप से घायल हो गया। विस्फोट के कारण सोढ़ी देवा के दाहिने पैर की एड़ी में गंभीर चोट आई। घटना के तुरंत बाद उसके साथ मौजूद लोगों ने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी। घायल को तत्काल उसूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है और उसका इलाज जारी है।
दूसरी घटना उसी दिन उसूर थाना क्षेत्र के ग्राम नम्बी के जंगल में हुई। पुलिस ने बताया कि गांव के दो ग्रामीण मवेशियों को चराने के लिए नम्बी जलधारा की ओर गए थे। इसी दौरान जंगल के रास्ते में माओवादियों द्वारा पहले से बिछाए गए प्रेशर आईईडी की चपेट में आने से 15 वर्षीय विनोद कट्टम, पिता चन्द्रु कट्टम, घायल हो गया। विस्फोट में उसके दाहिने पैर की एड़ी में चोट आई। घटना के बाद उसके साथ मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों को दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण घटनास्थल तक पहुंचने वाला मार्ग काफी प्रभावित है। रास्ते में पड़ने वाले नाले में जलभराव होने से आवागमन में कठिनाई आ रही है। इसके बावजूद सुरक्षा बलों ने सावधानी बरतते हुए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया और घायल तक पहुंचने का प्रयास किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने घायल को सुरक्षित बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल भेजने की कार्रवाई की।
पुलिस का कहना है कि माओवादी अक्सर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से जंगलों और ग्रामीण इलाकों में प्रेशर आईईडी बिछा देते हैं। हालांकि इन विस्फोटकों की चपेट में कई बार निर्दोष ग्रामीण, बच्चे और जंगल में जाने वाले लोग भी आ जाते हैं। यही कारण है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार लोगों को सतर्क रहने और अनजान रास्तों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है। घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन भी तेज कर दिया है। बम निरोधक दस्ते और सुरक्षा बल आसपास के इलाकों में अन्य संभावित विस्फोटकों की तलाश कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे जंगलों और संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से पहले स्थानीय प्रशासन या पुलिस से जानकारी अवश्य लें।
नीलम सराई जलप्रपात सहित बीजापुर के कई प्राकृतिक पर्यटन स्थल बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे में प्रशासन ने पर्यटकों से विशेष सावधानी बरतने और केवल सुरक्षित एवं निर्धारित मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। वहीं ग्रामीणों को भी जंगलों में मवेशी चराने या अन्य कार्यों के दौरान सतर्क रहने के लिए कहा गया है। इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों पहले लगाए गए प्रेशर आईईडी आज भी आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। पुलिस और सुरक्षा बल लगातार ऐसे विस्फोटकों को खोजकर निष्क्रिय करने का अभियान चला रहे हैं, लेकिन दुर्गम जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।