CG BREAKING: विशेष शिक्षकों की भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त

छत्तीसगढ़ शासन को 2 माह में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

Update: 2026-05-23 13:21 GMT

New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ शासन को विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि राज्य सरकार दो माह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया को पूर्ण करे और निर्धारित समयसीमा में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह मामला “राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य” शीर्षक से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था, जिसमें समावेशी शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कौस्तुभ शुक्ला तथा अधिवक्ता पलाश तिवारी ने विस्तृत पैरवी की। कौस्तुभ शुक्ला द्वारा छत्तीसगढ़ आरसीआई टीचर एसोसिएशन की ओर से भी हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किया गया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने न्यायालय को अवगत कराया कि प्रदेश में विशेष शिक्षकों के कुल 848 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 100 पदों पर भर्ती हेतु 3 अक्टूबर 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। इस प्रक्रिया में भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा निर्धारित योग्यता रखने वाले 62 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि शेष 38 पद शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित कारणों से रिक्त हैं। याचिकाकर्ताओं की दलीलों में यह भी बताया गया कि राज्य में वर्तमान में 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन संविदा आधार पर कार्यरत हैं, जबकि 85 विशेष शिक्षक निश्चित मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी को नियमित नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने की मांग भी रखी गई।



सुप्रीम कोर्ट ने इस पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा कि 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन और 85 विशेष शिक्षकों को उनके सभी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक दस्तावेजों के साथ स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत होने का अवसर दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ये अभ्यर्थी भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा करते हैं तो उनकी नियुक्ति पर विधिसम्मत विचार किया जाए। न्यायालय ने अपने आदेश में राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हो। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि योग्य पाए जाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया अधिकतम दो माह के भीतर पूरी की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि छत्तीसगढ़ में लगभग 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं, जिनके लिए करीब 3981 विशेष शिक्षकों की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की कमी समावेशी शिक्षा व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बनती है और इसे शीघ्र दूर किया जाना आवश्यक है। न्यायालय ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा किसी भी राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी आवश्यक कदम समय पर उठाए ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। इस आदेश को छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था और विशेष रूप से समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जा रहा है। अब राज्य सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा और अदालत के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
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