भागलपुर: बिहार के भागलपुर स्थित तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में उर्दू विषय के प्रश्नपत्र में कथित गलतियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। MJC-2 उर्दू की परीक्षा के प्रश्नपत्र में भाषा और व्याकरण से जुड़ी त्रुटियों का आरोप लगाते हुए छात्र जनता दल यूनाइटेड (छात्र JDU) ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने तंज कसते हुए पूछा कि प्रश्नपत्र तैयार करने वालों को स्त्रीलिंग और पुल्लिंग का भी ज्ञान नहीं है क्या?

मामला विश्वविद्यालय की परीक्षा में पूछे गए MJC-2 उर्दू के प्रश्नपत्र से जुड़ा है। छात्र संगठन का आरोप है कि पेपर में ऐसी गलतियां हैं, जिन्हें सामान्य स्तर की सावधानी से भी रोका जा सकता था। प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, इसलिए इसमें भाषाई त्रुटियां सामने आने के बाद छात्रों ने परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
छात्र JDU से जुड़े नेताओं ने प्रश्नपत्र में मौजूद कथित गलतियों को लेकर नाराजगी जताई। संगठन का कहना है कि
विश्वविद्यालय स्तर
की परीक्षा के प्रश्नपत्र में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग तक से संबंधित त्रुटियां होना गंभीर मामला है। इससे न केवल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं बल्कि परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों को भी भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
संगठन ने सवाल उठाया कि आखिर प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले उसकी जांच किस स्तर पर की गई। सामान्य तौर पर प्रश्नपत्र तैयार करने के बाद उसकी भाषा, पाठ्यक्रम से प्रासंगिकता और तकनीकी शुद्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों की होती है। ऐसे में त्रुटियां रह जाने पर समीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
छात्रों के लिए प्रश्नपत्र में छोटी दिखाई देने वाली गलती भी महत्वपूर्ण हो सकती है। किसी शब्द, वाक्य या व्याकरण में गलती होने से प्रश्न का अर्थ बदल सकता है और परीक्षार्थी यह तय नहीं कर पाता कि उत्तर किस संदर्भ में दिया जाए। खासकर भाषा विषय की परीक्षा में व्याकरण और शब्दों की शुद्धता का महत्व और बढ़ जाता है।
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह पता लगाने की मांग की गई है कि प्रश्नपत्र किस स्तर पर तैयार हुआ और गलतियां पकड़ में क्यों नहीं आईं। यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की जा रही है।
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय बिहार के प्रमुख विश्वविद्यालयों में शामिल है और इसके अंतर्गत बड़ी संख्या में कॉलेज आते हैं। हजारों विद्यार्थी विश्वविद्यालय की विभिन्न परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य से सीधे जुड़ी होती है।
उर्दू के प्रश्नपत्र में कथित त्रुटियों का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा केवल एक पेपर तक सीमित नहीं रह गया है। छात्र संगठन इसे परीक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता से जोड़ रहा है। उसका कहना है कि प्रश्नपत्र प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ स्तर पर उसकी ठीक से जांच की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति पैदा न हो।
इस विवाद ने प्रश्नपत्रों की प्रूफ रीडिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर यदि भाषा विषय के प्रश्नपत्र में ही व्याकरण संबंधी गलतियां रह जाती हैं तो छात्रों के बीच संस्था की शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर गलत संदेश जा सकता है। इसलिए छात्र संगठन ने प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी समीक्षा की प्रक्रिया को मजबूत करने की मांग की है।
अब नजर TMBU प्रशासन की प्रतिक्रिया पर है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि प्रश्नपत्र में वास्तव में कितनी और किस तरह की त्रुटियां थीं तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार था। फिलहाल छात्र JDU के विरोध और तीखे सवालों के बाद MJC-2 उर्दू का प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बन गया है।
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