झारखंड

पूर्व RJD एमएलसी के सील प्लांट में सेंध जांच में नया मोड़

nidhi
18 Aug 2026 8:47 AM IST
पूर्व RJD एमएलसी के सील प्लांट में सेंध जांच में नया मोड़
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सील प्लांट से सामान गायब पुलिस सुरक्षा पर सवाल
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के ओरमांझी में स्थित सीलबंद शराब बाटलिंग प्लांट में कथित रूप से ताला तोड़े जाने और सामान गायब होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह प्लांट बिहार के पूर्व राजद एमएलसी सुबोध कुमार राय से जुड़ा बताया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परिसर सील होने के साथ वहां पुलिस की निगरानी भी थी, इसके बावजूद अंदर रखे महत्वपूर्ण सामान और संभावित साक्ष्यों के गायब होने की आशंका जताई जा रही है।
मामला ओरमांझी के उकरीद स्थित तरंगिनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड के बाटलिंग प्लांट से जुड़ा है। हाल में अवैध शराब कारोबार से जुड़े मामले में कार्रवाई के बाद प्लांट को सील किया गया था। जांच एजेंसियों के लिए परिसर में मौजूद मशीनें, दस्तावेज, बोतलें, लेबल और अन्य सामग्री महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते थे। ऐसे में सील परिसर के भीतर कथित छेड़छाड़ ने जांच की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
यह प्लांट पहले भी विवादों में रहा है। मार्च 2023 में उत्पाद विभाग ने यहां छापेमारी कर 108 पेटी अवैध शराब जब्त की थी। इसके अलावा एक ट्रक, कार, खाली बोतलें और शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी जब्त की गई थी। उस कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था और फैक्ट्री को सील कर दिया गया था।
उस समय भी प्लांट को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। स्थानीय लोगों और वहां काम करने वाले कुछ मजदूरों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया था कि प्लांट लंबे समय से संचालित हो रहा था और रात के समय भी यहां गतिविधियां होती थीं। तत्कालीन भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी प्लांट के संचालन को लेकर राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगाए थे। ये आरोप उस समय राजनीतिक विवाद का विषय बने थे।
अब ताजा घटनाक्रम में सील परिसर की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की मौजूदगी और सीलिंग के बावजूद परिसर के भीतर कथित तौर पर छेड़छाड़ हुई। यदि जांच में यह साबित होता है कि सील तोड़कर सामान हटाया गया है, तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि यह किसने किया और सुरक्षा में तैनात लोगों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। किसी भी जांच में सील किया गया परिसर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सीलिंग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जांच पूरी होने तक वहां मौजूद वस्तुओं, दस्तावेजों या अन्य साक्ष्यों से कोई छेड़छाड़ न हो। अगर सील तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया हो तो यह न केवल सुरक्षा में बड़ी चूक होगी बल्कि जांच को प्रभावित करने की कोशिश की आशंका भी पैदा कर सकता है।
अब अधिकारियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि प्लांट की सील कब और किन परिस्थितियों में टूटी। इसके लिए परिसर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, पुलिस ड्यूटी रिकॉर्ड और वहां आने-जाने वाले लोगों की जानकारी की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। साथ ही यह भी मिलान करना होगा कि सीलिंग के समय परिसर में कौन-कौन सी वस्तुएं मौजूद थीं और वर्तमान में उनमें से क्या-क्या गायब है। मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि प्लांट पहले से शराब के कथित अवैध कारोबार से जुड़ी जांच के दायरे में रहा है। हालिया घटनाक्रम में पूर्व राजद एमएलसी सुबोध राय की गिरफ्तारी की खबरें भी सामने आई थीं। ऐसे में सील परिसर में कथित छेड़छाड़ को जांच एजेंसियां हल्के में नहीं ले सकतीं।
पुलिस सुरक्षा के बावजूद ताला टूटने की बात सही पाई जाती है तो संबंधित सुरक्षाकर्मियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है। यह जांच का विषय होगा कि घटना के समय कौन ड्यूटी पर था, निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी और सील परिसर तक बाहरी व्यक्ति कैसे पहुंचा।
फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब जांच से मिलने बाकी हैं। सबसे अहम सवाल यही है कि सीलबंद बाटलिंग प्लांट में प्रवेश किसने किया और क्या वहां से जांच से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हटाए गए। आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह सामान्य सुरक्षा चूक थी या इसके पीछे सबूतों से छेड़छाड़ की सुनियोजित कोशिश थी। ओरमांझी के इस बाटलिंग प्लांट का मामला अब केवल कथित अवैध शराब कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस की निगरानी में सील परिसर की सुरक्षा टूटने के आरोप ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच में यदि साक्ष्यों के गायब होने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के साथ सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है।
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