गया में बदलेगा विष्णुपद मंदिर क्षेत्र का स्वरूप, 2520 करोड़ से बनेगा कॉरिडोर
पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास, सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना, जलस्रोतों के संरक्षण और राज्य में हवाई संपर्क को मजबूत करने से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सरकार के इन निर्णयों से धार्मिक पर्यटन, आधारभूत संरचना और क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल ने गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने के लिए 2520 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत विष्णुपद मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र का व्यापक पुनर्विकास किया जाएगा। योजना का उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक और आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मंदिर परिसर से लेकर घाट तक होगा विकास
विष्णुपद क्षेत्र के विकास की प्रस्तावित योजना में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और विस्तार के साथ श्रद्धालुओं के लिए कई आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। योजना में मल्टीलेवल पार्किंग, एलीवेटेड पथ, घाट और डोरमेट्री जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इससे मंदिर क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम होने के साथ पार्किंग और ठहरने की समस्या को भी कम करने में मदद मिलेगी।
गया का विष्णुपद मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बिहार के प्रमुख स्थलों में शामिल है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं। खासकर पितृपक्ष के दौरान गया में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार लंबे समय से महत्वपूर्ण आवश्यकता माना जाता रहा है।
2520 करोड़ रुपये की इस योजना के लागू होने के बाद विष्णुपद मंदिर क्षेत्र का स्वरूप व्यापक रूप से बदलने की संभावना है। आधुनिक यातायात व्यवस्था, बेहतर पैदल मार्ग, पार्किंग और ठहरने की सुविधाओं के विकसित होने से श्रद्धालुओं को अधिक व्यवस्थित वातावरण मिल सकेगा।
सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना को भी मंजूरी
मंत्रिमंडल की बैठक में सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना को भी हरी झंडी दी गई। इस योजना को जल प्रबंधन और जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नदी जोड़ने की योजना के माध्यम से जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और संबंधित क्षेत्रों में जल उपलब्धता को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
बिहार में जल संसाधनों का संरक्षण सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियों में रहा है। वर्षा के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त जल का उपयोग और जरूरत वाले क्षेत्रों तक जल पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम किया जा रहा है। सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
जलस्रोतों के संरक्षण पर भी जोर
राज्य मंत्रिमंडल ने जलस्रोतों के संरक्षण से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। सरकार का जोर पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण, जल उपलब्धता बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर है।
जलवायु परिवर्तन और अनियमित बारिश के दौर में जलस्रोतों का संरक्षण और उनका पुनर्जीवन काफी महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में सरकार के फैसले से तालाबों, नदियों और अन्य जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किए जाने की उम्मीद है।
हवाई संपर्क को बढ़ावा देने की तैयारी
मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में हवाई संपर्क को बढ़ाने से जुड़े फैसले भी लिए गए। बेहतर हवाई संपर्क से बिहार के प्रमुख शहरों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
गया पहले से ही धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण केंद्र है। विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास के साथ बेहतर हवाई संपर्क होने पर गया आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इससे स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन और अन्य सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास की योजना को बिहार में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किए जाने की योजना से गया के धार्मिक महत्व को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार की योजना के तहत मंदिर क्षेत्र को सिर्फ पूजा-अर्चना के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर सुविधाओं से युक्त धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर है। मल्टीलेवल पार्किंग से वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने, एलीवेटेड पथ से पैदल आवागमन को सुविधाजनक बनाने तथा घाटों के विकास से पूरे क्षेत्र को नया स्वरूप मिलने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल के 17 प्रस्तावों को मिली मंजूरी के बाद अब संबंधित विभागों के स्तर पर इन योजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। विष्णुपद क्षेत्र के लिए 2520 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति को गया के विकास की दृष्टि से बड़ा फैसला माना जा रहा है।