मुंगेर: बिहार के मुंगेर सदर अस्पताल में रात के समय स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और दवाएं उपलब्ध नहीं होने से मरीजों तथा उनके परिजनों को परेशानी होने का दावा किया गया है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि रात की ड्यूटी में एक डॉक्टर के जिम्मे सात वार्ड तक हैं। ICU से लेकर PICU तक मरीजों की देखभाल और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
सामने आई जानकारी के मुताबिक अस्पताल में दिन के समय डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी अपेक्षाकृत अधिक रहती है, लेकिन रात में स्थिति बदल जाती है। दावा है कि एक डॉक्टर को एक साथ कई वार्डों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। ऐसे में किसी एक वार्ड में गंभीर मरीज आने पर दूसरे वार्ड के मरीजों को डॉक्टर के पहुंचने का इंतजार करना पड़ सकता है।
अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। कुछ सिलेंडर खाली मिलने का दावा किया गया है। हालांकि अस्पताल में ऑक्सीजन की कुल उपलब्धता कितनी थी और क्या किसी मरीज की चिकित्सा इससे प्रभावित हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। केवल खाली सिलेंडर मिलने से पूरे अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इसी तरह मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। सरकारी अस्पतालों में निर्धारित आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था होती है, लेकिन आरोप है कि कुछ मरीजों को जरूरी दवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। किन दवाओं की कमी थी और अस्पताल के स्टॉक में उनकी वास्तविक स्थिति क्या थी, इसकी पुष्टि अस्पताल प्रशासन से की जानी जरूरी है। सबसे ज्यादा चिंता ICU और PICU जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों को लेकर जताई गई है। इन वार्डों में गंभीर मरीजों और बच्चों का उपचार होता है, इसलिए यहां डॉक्टर, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। रात में स्टाफ की कमी का दावा सही है तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।
अस्पताल पहुंचे मरीजों के परिजनों का आरोप है कि रात में डॉक्टर को तलाशने और दवाओं की व्यवस्था करने में उन्हें परेशानी होती है। हालांकि इन शिकायतों के साथ अस्पताल प्रशासन का पक्ष भी लिया जाना जरूरी है। ड्यूटी रोस्टर से यह स्पष्ट हो सकता है कि रात में वास्तव में कितने डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात थे।
मुंगेर सदर अस्पताल जिले का महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है और बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में आपातकालीन सेवाओं का चौबीस घंटे सुचारू रहना आवश्यक है। फिलहाल डॉक्टरों की कमी, खाली ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाओं की अनुपलब्धता से जुड़े दावों की आधिकारिक जांच और अस्पताल प्रशासन का जवाब महत्वपूर्ण है। रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की पुष्टि के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रात के समय अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तव में कितनी कमी थी।
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