पत्नेश्वर धाम के पास पुल की रेलिंग जर्जर, बाहर निकली छड़ों से हादसे का खतरा
जमुई। जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर पत्नेश्वर धाम के समीप किऊल नदी पर बने महत्वपूर्ण पुल की हालत लगातार खराब होती जा रही है। पुल के दोनों ओर सुरक्षा के लिए लगाई गई कंक्रीट की रेलिंग कई स्थानों पर टूट चुकी है। कंक्रीट उखड़ने के बाद लोहे की छड़ें बाहर निकल आई हैं, जिससे इस मार्ग पर गुजरने वाले वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से अब तक रेलिंग की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई है।
यह पुल जिला मुख्यालय को मलयपुर और जमुई रेलवे स्टेशन से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री, स्थानीय लोग, स्कूली वाहन, ऑटो, बसें और मालवाहक गाड़ियां इस पुल से होकर गुजरती हैं। भागलपुर, बांका, देवघर और मुंगेर की ओर जाने वाले कई छोटे-बड़े वाहनों के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण माना जाता है। यातायात का दबाव अधिक होने के बावजूद पुल की सुरक्षा रेलिंग की खराब स्थिति चिंता बढ़ा रही है।
कई जगहों पर उखड़ चुका कंक्रीट
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल की रेलिंग लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। कई हिस्सों में सीमेंट और कंक्रीट पूरी तरह टूटकर गिर चुका है। इसके कारण अंदर मौजूद लोहे की सरिया दिखाई देने लगी है। कुछ स्थानों पर रेलिंग का बड़ा हिस्सा कमजोर हो चुका है, जबकि कहीं-कहीं दरारें लगातार बढ़ रही हैं।
बाहर निकली लोहे की छड़ें विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों, साइकिल सवारों और पैदल राहगीरों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने या सामने से भारी वाहन आने की स्थिति में चालक टूटी रेलिंग और निकली हुई छड़ों को समय रहते नहीं देख पाते। थोड़ी सी लापरवाही से वाहन रेलिंग से टकरा सकता है।
किऊल नदी के ऊपर बने इस पुल पर सुरक्षा रेलिंग का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि कोई वाहन अनियंत्रित होकर किनारे की ओर बढ़ता है तो रेलिंग उसे नदी में गिरने से रोकने वाली पहली सुरक्षा व्यवस्था होती है। कमजोर या टूटी रेलिंग ऐसी स्थिति में वाहन का दबाव सह पाएगी या नहीं, इसे लेकर स्थानीय लोगों में संशय है।
भारी वाहनों का लगातार आवागमन
जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर दिनभर भारी और हल्के वाहनों की आवाजाही रहती है। रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों के अलावा आसपास के गांवों के लोग भी बाजार, अस्पताल, शिक्षण संस्थान और सरकारी कार्यालय पहुंचने के लिए इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। दूसरे जिलों और झारखंड की ओर जाने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए भी यह मार्ग उपयोगी है।
पुल पर वाहनों का दबाव बढ़ने से उसके विभिन्न हिस्सों की नियमित तकनीकी जांच जरूरी हो जाती है। केवल सड़क की ऊपरी सतह की मरम्मत पर्याप्त नहीं है। रेलिंग, जोड़, पिलर, बेयरिंग, पहुंच पथ और जलनिकासी व्यवस्था की भी समय-समय पर जांच होनी चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलिंग की बदहाली स्पष्ट दिखाई देने के बावजूद उसकी मरम्मत में देरी की जा रही है।
व्यस्त समय में पुल पर एक साथ कई वाहन पहुंच जाते हैं। सामने से भारी वाहन आने पर दोपहिया चालकों को पुल के किनारे से होकर निकलना पड़ता है। ऐसे में टूटी रेलिंग और बाहर निकली छड़ें उनके लिए खतरा बन जाती हैं। यदि वाहन का संतुलन बिगड़ जाए तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है पुल
पत्नेश्वर धाम धार्मिक और प्राकृतिक महत्व वाला स्थान है। विशेष अवसरों, पर्व-त्योहारों और सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु पैदल या दोपहिया वाहनों से पुल पार करते हैं। सामान्य दिनों में भी मंदिर आने वाले लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की संख्या बढ़ने के दौरान पुल पर सुरक्षा व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। टूटी रेलिंग के पास भीड़ जमा होने या किसी वाहन के अचानक अनियंत्रित होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी क्षतिग्रस्त हिस्से जोखिम पैदा कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मरम्मत होने तक जर्जर हिस्सों के पास अस्थायी अवरोधक लगाए जाएं। रात में वाहन चालकों को सावधान करने के लिए रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेत और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जानी चाहिए। टूटी रेलिंग के आसपास लाल पट्टी या मजबूत बैरिकेड लगाने से तत्काल जोखिम कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग
लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को केवल क्षतिग्रस्त रेलिंग की मरम्मत तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पुल का विस्तृत तकनीकी निरीक्षण कराकर यह पता लगाया जाना चाहिए कि मुख्य संरचना सुरक्षित है या नहीं। हालांकि फिलहाल पुल के पिलर या मुख्य ढांचे में खराबी की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए बिना तकनीकी जांच के पूरे पुल को असुरक्षित बताना उचित नहीं होगा।
रेलिंग का टूटना अलग सुरक्षा समस्या है और इसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाना जरूरी है। विशेषज्ञों की टीम से निरीक्षण कराने पर क्षति की वास्तविक सीमा और मरम्मत की आवश्यकता स्पष्ट हो सकेगी। कमजोर हिस्सों को हटाकर नई कंक्रीट रेलिंग लगाने या मजबूत धातु अवरोधक स्थापित करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
समय रहते मरम्मत जरूरी
बरसात के दौरान खुले लोहे पर पानी पड़ने से जंग लगने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। जंग के कारण रेलिंग के बचे हुए हिस्से की मजबूती भी प्रभावित होने की आशंका रहती है। वाहनों के कंपन और मौसम के प्रभाव से दरारें आगे बढ़ सकती हैं। इसलिए क्षतिग्रस्त हिस्सों को लंबे समय तक छोड़ना समस्या को और गंभीर बना सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित निर्माण विभाग से पुल की रेलिंग का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किए बिना मरम्मत शुरू की जानी चाहिए। यह पुल रेलवे स्टेशन, जिला मुख्यालय और कई प्रमुख शहरों को जोड़ता है, इसलिए इसकी सुरक्षा में लापरवाही हजारों यात्रियों के लिए जोखिम बन सकती है।