बिहार के तीन बड़े अधिकारी एक साथ छुट्टी पर, प्रशासनिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
पटना। बिहार में तीन महत्वपूर्ण पदों पर बैठे वरिष्ठ अधिकारियों के लगभग एक ही समय पर अवकाश पर जाने से प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार, बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी छुट्टी पर चले गए हैं। तीनों अधिकारियों ने अपने अवकाश के अलग-अलग कारण बताए हैं और फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे इन छुट्टियों को आपस में जोड़ा जा सके।
डीजीपी विनय कुमार 21 दिनों के अवकाश पर गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने इसे लीव ट्रैवल कंसेशन यानी एलटीसी से जुड़ा अवकाश बताया है। विनय कुमार का कहना है कि उन्होंने पिछले करीब 10 वर्षों से एलटीसी का उपयोग नहीं किया था, जबकि आईपीएस अधिकारियों के लिए इसका निर्धारित प्रावधान है। वह इसी वर्ष दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। अपने अवकाश को लेकर लग रहे कयासों पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार किया है।
डीजीपी के अवकाश पर रहने के दौरान बिहार पुलिस की कमान वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा को सौंपी गई है। गृह विभाग ने प्रीता वर्मा को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया है। वह 1991 बैच की बिहार कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवाओं की महानिदेशक हैं। विनय कुमार की अनुपस्थिति में वह अपने मौजूदा दायित्व के साथ डीजीपी का कामकाज भी संभालेंगी।
दूसरी ओर बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई भी अवकाश पर चले गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वह 15 सितंबर से 9 अक्टूबर तक छुट्टी पर रहेंगे। उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारण बताए हैं। उनकी अनुपस्थिति में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा को बीपीएससी अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट भी परमार रवि मनुभाई को आयोग का अध्यक्ष बताती है। वह 1992 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं और 16 मार्च 2024 से बीपीएससी अध्यक्ष के पद पर हैं। आयोग के लिए आने वाला समय महत्वपूर्ण है क्योंकि कई भर्ती प्रक्रियाएं और परीक्षाएं उसके जिम्मे हैं। ऐसे में अध्यक्ष के अवकाश के दौरान अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था से आयोग के नियमित प्रशासनिक कार्यों को जारी रखने की कोशिश की गई है।
तीसरे वरिष्ठ अधिकारी बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के अध्यक्ष केएस द्विवेदी हैं। वह करीब एक महीने के अवकाश पर गए हैं और इसके पीछे पारिवारिक कारण बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार बीपीएसएससी अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार फिलहाल किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपा गया है।
तीनों अधिकारियों के एक साथ अवकाश पर जाने का घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ये तीनों पद राज्य की प्रशासनिक और भर्ती व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पद हैं। डीजीपी राज्य पुलिस का नेतृत्व करते हैं, जबकि बीपीएससी राज्य की विभिन्न महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों की प्रक्रिया संभालता है। इसी तरह बीपीएसएससी पुलिस अवर निरीक्षक सहित विभिन्न पदों की भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा आयोग है।
बीपीएसएससी अध्यक्ष केएस द्विवेदी के अवकाश का समय भी चर्चा में है क्योंकि हाल में दारोगा भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद और अभ्यर्थियों के आरोप सामने आए हैं। हालांकि द्विवेदी के अवकाश और परीक्षा विवाद के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध रिपोर्ट में उनके अवकाश का कारण पारिवारिक बताया गया है। इसलिए दोनों घटनाओं को सीधे जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
इसी तरह बीपीएससी अध्यक्ष के अवकाश को भी किसी भर्ती विवाद या अन्य प्रशासनिक घटनाक्रम से जोड़ने वाली कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर आयोग की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से संबंधित विभिन्न सूचनाएं लगातार जारी हैं।
तीनों वरिष्ठ पदधारकों की छुट्टियों की अवधि भी अलग-अलग है। डीजीपी विनय कुमार 21 दिनों के लिए अवकाश पर हैं, बीपीएससी अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई 15 सितंबर से 9 अक्टूबर तक छुट्टी पर रहेंगे, जबकि बीपीएसएससी अध्यक्ष केएस द्विवेदी करीब एक महीने के अवकाश पर हैं। इनके बताए गए कारण भी क्रमशः एलटीसी, व्यक्तिगत और पारिवारिक हैं।
इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं जरूर हो रही हैं, लेकिन अभी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तीनों अधिकारियों के अवकाश के बीच कोई साझा कारण स्थापित नहीं होता। सरकार ने डीजीपी और बीपीएससी अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था कर दी है, जबकि बीपीएसएससी अध्यक्ष पद को लेकर आगे की प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रहेगी।
तीन महत्वपूर्ण अधिकारियों का लगभग एक ही समय पर छुट्टी पर जाना असामान्य संयोग के रूप में चर्चा में है। हालांकि जब तक सरकार या संबंधित अधिकारी कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं देते, तब तक अवकाश के पीछे बताए गए आधिकारिक और व्यक्तिगत कारणों से आगे कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।