राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सुठालिया क्षेत्र में पार्वती नदी पर निर्माणाधीन बड़ी सिंचाई परियोजना को लेकर प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। मंगलवार को परियोजना से प्रभावित लोगों ने मुआवजे और पुनर्वास समेत विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने नौ मांगें रखी हैं और उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक सामाजिक कार्यकर्ता और किसान आमरण अनशन जारी रखेंगे।

आंदोलन में शामिल किसानों का मुख्य आरोप है कि सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले परिवारों को उनकी जमीन और अन्य संपत्तियों के बदले पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया है। किसानों का कहना है कि कई प्रभावित परिवारों को मिलने वाली राशि बेहद कम है, जबकि कुछ वास्तविक प्रभावित लोगों को मुआवजे का पूरा लाभ नहीं मिलने का भी आरोप लगाया गया है।

किसानों ने मांग की है कि परियोजना से प्रभावित प्रत्येक परिवार और उसकी संपत्ति का उचित तरीके से आकलन किया जाए। जमीन, मकान और आजीविका के नुकसान को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही पुनर्वास से संबंधित समस्याओं को भी प्राथमिकता से हल करने की मांग उठाई गई है।

नौ मांगों को लेकर आंदोलन

आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने कुल नौ मांगें रखी हैं। इन मांगों में परियोजना से प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के मुआवजे तथा पुनर्वास से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना का लाभ व्यापक क्षेत्र को मिल सकता है, लेकिन इसके कारण अपनी जमीन और घर गंवाने वाले लोगों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

आंदोलन से जुड़े लोगों ने दावा किया कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को प्रशासन और सरकार के सामने रख रहे हैं। समाधान नहीं निकलने के कारण अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। किसानों ने कहा कि वे विकास परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को उचित अधिकार और मुआवजा मिलना चाहिए।

आमरण अनशन पर बैठे किसान

मंगलवार से शुरू हुए आंदोलन में किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनशन जारी रहेगा।

आंदोलन स्थल पर आसपास के गांवों से भी किसान और प्रभावित परिवार पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी के कारण परियोजना से जुड़े मुआवजे और पुनर्वास का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी नौ सूत्रीय मांगों पर केवल आश्वासन देने के बजाय लिखित और ठोस कार्रवाई की जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों के भविष्य से जुड़ा मामला होने के कारण वे मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखेंगे।

मेधा पाटकर भी पहुंचीं आंदोलन स्थल

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर भी आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और प्रभावित किसानों तथा ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों के समर्थन में सरकार से समाधान निकालने की अपील की।

पाटकर ने परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि किसी भी विकास परियोजना में प्रभावित लोगों के अधिकारों और आजीविका को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने सरकार से किसानों की मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालने को कहा।

मेधा पाटकर की मौजूदगी के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा बढ़ गई है। किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से मांग की जा रही है कि प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ बातचीत करे और विवाद को जल्द सुलझाए।

डूब क्षेत्र के परिवारों ने उठाए सवाल

परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के लोगों की सबसे बड़ी चिंता अपनी जमीन, मकान और आजीविका को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि कृषि भूमि उनके परिवारों की आय का प्रमुख साधन है। यदि जमीन परियोजना के लिए चली जाती है तो उन्हें भविष्य में आजीविका चलाने के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता और पुनर्वास की जरूरत होगी।

किसानों का आरोप है कि वर्तमान मुआवजा उनकी वास्तविक क्षति की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि जमीन की मौजूदा कीमत और उससे मिलने वाली आजीविका को ध्यान में रखते हुए मुआवजे का निर्धारण होना चाहिए।

हालांकि मुआवजे की वास्तविक राशि, प्रभावित परिवारों की संख्या और कितने परिवारों को भुगतान नहीं मिला है, इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। आंदोलनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों को फिलहाल उनके दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।

सिंचाई परियोजना से किसानों को लाभ की उम्मीद

पार्वती नदी पर निर्माणाधीन सिंचाई परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। ऐसी परियोजनाओं से कृषि भूमि तक पानी पहुंचाने और किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। दूसरी ओर परियोजना के निर्माण से डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों और जमीनों के पुनर्वास तथा मुआवजे का प्रश्न भी महत्वपूर्ण होता है।

यही कारण है कि सुठालिया क्षेत्र में परियोजना के संभावित लाभ के साथ प्रभावित परिवारों के अधिकारों का मुद्दा भी सामने आया है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि परियोजना आगे बढ़ाने के साथ उनकी समस्याओं का समाधान भी किया जाए।

प्रशासन के रुख पर टिकी नजर

आंदोलन और आमरण अनशन शुरू होने के बाद अब नजर प्रशासन और राज्य सरकार के अगले कदम पर है। किसानों ने साफ कर दिया है कि उनकी नौ मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल आंदोलन स्थल पर किसान और सामाजिक कार्यकर्ता डटे हुए हैं। मुआवजा, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के अधिकार इस आंदोलन के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।

Tags: