सम्राट सरकार का नया मेगा प्लान

Update: 2026-06-27 12:12 GMT

पटना: बिहार में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग, बाढ़-सूखे की आपदाओं से बचाव और सिंचाई प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार एक नई जल नीति (New Water Policy) लाने की व्यापक तैयारी में है। इस नीति के तहत राज्य की नदियों की निगरानी पूरी तरह डिजिटल होगी और पानी के संतुलित वितरण के लिए एक नई 'स्टेट वाटर अथॉरिटी' (State Water Authority) के गठन पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आधुनिक तकनीक के सहारे पानी की बर्बादी को रोकना और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराना है।

जल प्रबंधन प्रणाली होगी पूरी तरह डिजिटल और हाईटेक

नई जल नीति के लागू होने के बाद बिहार में जल प्रबंधन को पूरी तरह तकनीक आधारित (Tech-driven) बनाया जाएगा। राज्य की प्रमुख नदियों के जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए आधुनिक डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल होगा। इस हाईटेक प्रणाली से बाढ़ और सूखे की स्थिति का पहले से ही सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस एडवांस वार्निंग सिस्टम के जरिए आपदा के समय जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और समय रहते सुरक्षित कदम उठाए जा सकेंगे।

नई वाटर अथॉरिटी और स्टेट वाटर रिसोर्स रिफॉर्म फ्रेमवर्क

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार मौजूदा जल संसाधन संस्थाओं और उनके काम करने के तरीकों की समीक्षा कर रही है। व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरत पड़ने पर एक नई वाटर अथॉरिटी और अन्य तकनीकी संस्थानों का गठन किया जाएगा। इसके लिए बिहार का जल संसाधन विभाग, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय (नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग) के सहयोग से एक विशेष 'स्टेट वाटर रिसोर्स रिफॉर्म फ्रेमवर्क' तैयार कर रहा है, जो राज्य में पानी के उपयोग से जुड़े बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदल देगा।

उच्च स्तरीय समिति करेगी पूरे फ्रेमवर्क की निगरानी

इस नई और महत्वाकांक्षी नीति की रूपरेखा तैयार करने के लिए मुख्य अभियंता (Chief Engineer) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। इस समिति में जल संसाधन, कृषि, पर्यावरण, नगर विकास, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED), ग्रामीण विकास और लघु जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह अंतर-विभागीय समिति सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पूरे फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने का काम कर रही है।

भूजल स्तर में सुधार और डैमों में लगेंगे सेंसर आधारित मीटर

बिहार सरकार की इस नई नीति में लगातार गिरते भूजल स्तर (Groundwater Level) को सुधारने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार की योजना है। इसके साथ ही, नदी से जुड़े आंकड़ों (Data) को अधिक सटीक और उपयोगी बनाया जाएगा ताकि भविष्य की जल परियोजनाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग की जा सके। पुरानी पड़ चुकी जल नियमावलियों और कानूनों को भी समय के अनुसार अपडेट किया जाएगा। पानी की बर्बादी रोकने के लिए राज्य के प्रमुख डैमों में सेंसर आधारित मीटर लगाए जाएंगे और नहरों के जरिए पानी के बहाव की आधुनिक तकनीक से निगरानी होगी।

किसानों, शहरों और उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ

इस नई नीति का सबसे बड़ा लाभ बिहार के किसानों को मिलेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद नहरों के जरिए सिंचाई के लिए पानी का न्यायसंगत और बेहतर वितरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे टेल एंड (अंतिम छोर) तक के खेतों को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। इसके अतिरिक्त, राज्य की औद्योगिक इकाइयों और तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों के लिए भी संतुलित जल आपूर्ति (Water Supply) का खाका खींचा गया है। सरकार को भरोसा है कि इस मेगा रिफॉर्म प्लान के लागू होने के बाद बिहार जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में देश का एक आधुनिक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राज्य बनकर उभरेगा।

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