बिहार में SCERT के खाली पद जल्द भरे जाएंगे

Update: 2026-07-29 04:12 GMT

पटना। बिहार के शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मंगलवार को इस संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एससीईआरटी में रिक्त पदों की पहचान कर उन्हें भरने के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को अधियाचना भेजी जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने मंगलवार को विकास भवन स्थित सभागार में एससीईआरटी के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में परिषद के कामकाज, प्रशिक्षण व्यवस्था, शैक्षणिक गतिविधियों और मानव संसाधन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान अधिकारियों ने एससीईआरटी में रिक्त पदों की स्थिति और उनके कारणों की जानकारी दी।

मंत्री ने कहा कि एससीईआरटी राज्य की शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संस्थान है। यहां से शिक्षकों के प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम विकास, शैक्षणिक अनुसंधान और विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य संचालित होते हैं। ऐसे में परिषद में पर्याप्त संख्या में योग्य अधिकारियों और विशेषज्ञों की उपलब्धता जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एससीईआरटी में खाली पड़े सभी पदों का जल्द से जल्द आकलन किया जाए। इसके बाद पदों का विवरण तैयार कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के लिए बिहार लोक सेवा आयोग को भेजा जाए। सरकार का उद्देश्य है कि रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरकर संस्थान की कार्यक्षमता को और मजबूत किया जाए।

शिक्षा मंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। एससीईआरटी शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए परिषद को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

बैठक में शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि एससीईआरटी द्वारा समय-समय पर शिक्षकों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य शिक्षण पद्धतियों में सुधार लाना और नई तकनीकों से शिक्षकों को परिचित कराना है।

मंत्री ने निर्देश दिया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाया जाए तथा इसमें आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल शिक्षा और नई शैक्षणिक जरूरतों को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि बदलते समय के अनुसार शिक्षा प्रणाली में भी बदलाव जरूरी है और शिक्षकों को इसके लिए लगातार प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

समीक्षा बैठक में पाठ्य सामग्री के विकास और शैक्षणिक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। एससीईआरटी की जिम्मेदारी केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यालयी शिक्षा में सुधार के लिए शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना भी है। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री तैयार की जाए।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एससीईआरटी में पदों के खाली रहने से कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे थे। विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों की कमी के कारण प्रशिक्षण कार्यक्रमों की क्षमता पर भी असर पड़ता है। नई नियुक्तियों के बाद परिषद में कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कई कदम उठा रही है। स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति, आधारभूत सुविधाओं में सुधार और प्रशिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने के बाद अब एससीईआरटी में मानव संसाधन की कमी दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

शिक्षाविदों का मानना है कि एससीईआरटी जैसे संस्थानों को मजबूत किए बिना शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार संभव नहीं है। यदि यहां योग्य विशेषज्ञों की नियुक्ति होती है तो शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा और इसका सीधा लाभ राज्य के लाखों विद्यार्थियों तक पहुंचेगा।

बैठक में अधिकारियों ने परिषद की भविष्य की योजनाओं और कार्ययोजना की जानकारी भी दी। शिक्षा मंत्री ने सभी योजनाओं को समय पर पूरा करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।

सरकार के इस फैसले से एससीईआरटी में रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने के बाद योग्य अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में आने का मौका मिलेगा। साथ ही परिषद की कार्यक्षमता बढ़ने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।

फिलहाल शिक्षा विभाग रिक्त पदों की पहचान और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने में जुट गया है। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही पदों का विवरण तैयार कर बिहार लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा। इसके बाद आयोग की प्रक्रिया के अनुसार नियुक्तियों की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

बिहार सरकार का यह कदम राज्य में शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। एससीईआरटी को मजबूत करने से शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम विकास और शैक्षणिक अनुसंधान को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिसका सकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।

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