मोबाइल ने बिगाड़ी आदत, AIIMS देगा समाधान

Update: 2026-07-29 09:01 GMT

बिहार : बच्चों में बढ़ती मोबाइल फोन, इंटरनेट मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की आदत को लेकर शिक्षा विभाग अब गंभीर हो गया है। डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर पड़ने वाले असर को देखते हुए पटना जिले में एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिले के 61 स्कूलों में बच्चों को मोबाइल की लत से बचने और डिजिटल उपकरणों का सही तरीके से इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इस पहल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), पटना के विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा। शिक्षा विभाग और एम्स पटना मिलकर विद्यार्थियों को मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के नुकसान के बारे में जागरूक करेंगे। अभियान का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूर करना नहीं, बल्कि उन्हें इसका संतुलित और सुरक्षित उपयोग करना सिखाना है।

जानकारी के अनुसार, पटना जिले के 38 पीएमश्री स्कूलों और 23 मॉडल स्कूलों में विशेष जागरूकता कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने इस संबंध में सभी संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को डिजिटल उपकरणों के सही इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना समय की जरूरत है।

एम्स पटना के विशेषज्ञ इन विशेष कक्षाओं में विद्यार्थियों को बताएंगे कि जरूरत से ज्यादा मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञ बच्चों को मोबाइल की अधिक लत के कारण होने वाले मानसिक, शारीरिक और शैक्षणिक नुकसान के बारे में जानकारी देंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से बच्चों की नींद प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी, पढ़ाई में रुचि कम होना, आंखों पर दबाव और सामाजिक गतिविधियों से दूरी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ऑनलाइन गेमिंग की आदत कई बार बच्चों के व्यवहार और भावनात्मक स्थिति पर भी असर डाल सकती है।

इस अभियान को सफल बनाने के लिए एम्स पटना के प्राध्यापक डॉ. राजीव रंजन को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। उनके समन्वय में सभी स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को मोबाइल इस्तेमाल के लिए समय प्रबंधन, डिजिटल अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के तरीके बताए जाएंगे।

इन विशेष कक्षाओं में मुख्य रूप से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रशासन को निर्देश दिया है कि कार्यक्रम इस तरह आयोजित किए जाएं कि छात्रों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो। स्कूलों को समय और व्यवस्था के अनुसार इन कक्षाओं का आयोजन करने को कहा गया है।

शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चों में मोबाइल और इंटरनेट की आदत को लेकर समय रहते जागरूकता फैलाना जरूरी है। आज के समय में स्मार्टफोन शिक्षा और जानकारी का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि बच्चे तकनीक का इस्तेमाल जरूरत और सही उद्देश्य के लिए करें।

अभियान के दौरान छात्रों को यह भी बताया जाएगा कि मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग किस तरह पढ़ाई, रचनात्मक कार्यों और नई चीजें सीखने के लिए किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्हें खेलकूद, परिवार के साथ समय बिताने और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।

पटना शिक्षा विभाग और एम्स पटना की यह पहल बच्चों के डिजिटल व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस अभियान के जरिए छात्र मोबाइल की अनावश्यक निर्भरता को कम कर पाएंगे और तकनीक का इस्तेमाल बेहतर तरीके से करना सीखेंगे।

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