मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में एक निजी स्कूल की मैजिक वैन दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि स्कूल के बच्चों को लेकर जा रही मैजिक वैन अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के बाद वाहन चालक बच्चों को मौके पर छोड़कर फरार हो गया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। आसपास मौजूद लोगों ने वाहन में फंसे बच्चों को बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।
बच्चों को लेकर जा रही थी स्कूल वैन
जानकारी के अनुसार, निजी स्कूल की मैजिक वैन बच्चों को लेकर जा रही थी। स्कूल वाहन में कई छात्र सवार थे। रास्ते में अचानक चालक का नियंत्रण वाहन से हट गया, जिसके बाद मैजिक वैन सड़क पर पलट गई।
हादसा इतना अचानक हुआ कि बच्चों में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोगों ने आवाज सुनकर घटनास्थल पर पहुंचकर मदद शुरू की।
स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण बच्चों को समय रहते वाहन से बाहर निकाल लिया गया।
हादसे के बाद चालक फरार
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल चालक की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
बताया जा रहा है कि दुर्घटना के बाद चालक मौके पर रुकने के बजाय वहां से भाग निकला। बच्चों को घायल अवस्था में छोड़कर चालक के फरार होने की बात सामने आने के बाद अभिभावकों में नाराजगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद चालक की जिम्मेदारी थी कि वह बच्चों की मदद करता और उन्हें सुरक्षित अस्पताल या उनके परिजनों तक पहुंचाता।
पुलिस अब फरार चालक की तलाश में जुटी है।
बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर निजी स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अक्सर स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए छोटे वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कई बार इन वाहनों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की शिकायतें सामने आती हैं।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र वाले हों और चालकों का सत्यापन किया जाए।
बच्चों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसा किस वजह से हुआ।
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वाहन की स्थिति कैसी थी, चालक के पास वैध लाइसेंस था या नहीं और स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं।
फरार चालक के मिलने के बाद उससे पूछताछ की जाएगी।
अभिभावकों में नाराजगी
हादसे की खबर मिलने के बाद बच्चों के परिजन मौके पर पहुंचे।
बच्चों को सुरक्षित देखकर उन्हें राहत मिली, लेकिन चालक के फरार होने की घटना से अभिभावक नाराज दिखाई दिए।
परिजनों का कहना है कि स्कूल वाहन चलाने वाले चालक को बच्चों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
स्कूल वाहनों के लिए जरूरी नियम
स्कूल वाहनों को लेकर सरकार और परिवहन विभाग की ओर से कई नियम बनाए गए हैं।
इनमें वाहन की फिटनेस, चालक का अनुभव, स्पीड नियंत्रण, बच्चों की संख्या और सुरक्षा उपकरणों जैसी बातें शामिल हैं।
लेकिन कई जगहों पर नियमों का पूरी तरह पालन नहीं होने की शिकायतें आती रहती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों दोनों को वाहन की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
छोटे वाहन और बड़े जोखिम
मैजिक वैन जैसे छोटे वाहन ग्रामीण और छोटे शहरों में स्कूल परिवहन के लिए काफी इस्तेमाल किए जाते हैं।
इन वाहनों में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाने, तेज गति से चलाने और वाहन की नियमित जांच नहीं कराने जैसी समस्याएं कई बार सामने आती हैं।
ऐसी लापरवाही बच्चों की जान को खतरे में डाल सकती है।
हादसे रोकने के लिए क्या जरूरी?
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम जरूरी हैं—
* स्कूल वाहनों की नियमित जांच हो।
* चालकों का पुलिस सत्यापन कराया जाए।
* वाहन में क्षमता से अधिक बच्चों को न बैठाया जाए।
* चालक को बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित किया जाए।
* नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाए।
बच्चों की हालत की जानकारी
हादसे के बाद बच्चों की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और पुलिस से जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रशासन यह सुनिश्चित करने में लगा है कि सभी बच्चों को जरूरी सहायता मिले।
अगर किसी बच्चे को चोट आई है तो उसका इलाज कराया जा रहा है।
पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे मामले
देश के अलग-अलग हिस्सों में स्कूल वाहनों से जुड़े हादसे सामने आते रहे हैं।
कई मामलों में तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही या वाहन की खराब स्थिति को हादसे की वजह बताया जाता है।
इन घटनाओं के बाद स्कूल परिवहन व्यवस्था की निगरानी बढ़ाने की मांग उठती रही है।