
भोजपुर। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एम्बुलेंस में शराब की तस्करी का मामला सामने आया है। मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग भोजपुर की टीम ने बक्सर-पटना फोरलेन पर एक मारुति सुजुकी ईको एम्बुलेंस से 388 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद की है। शराब वाहन के भीतर बनाए गए गुप्त तहखाने में छिपाई गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह खेप हरियाणा से पटना ले जाई जा रही थी। विभाग की टीम ने रतनपुर यात्री शेड के पास वाहन को पकड़कर उसमें सवार तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सहायक आयुक्त मद्यनिषेध रजनीश को जानकारी मिली थी कि हरियाणा से एक एम्बुलेंस के जरिए बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब बिहार लाई जा रही है। सूचना में एम्बुलेंस के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद वाहन को पकड़ने के लिए टीम गठित की गई। सहायक आयुक्त के निर्देश पर निरीक्षक प्रकाश चन्द्र को छापेमारी टीम का नेतृत्व सौंपा गया। टीम ने सूचना के आधार पर बक्सर-पटना फोरलेन पर वाहन को रोकने की तैयारी की।
विभाग की टीम ने रतनपुर यात्री शेड के पास जाल बिछाया और संबंधित एम्बुलेंस को रोक लिया। कार्रवाई के दौरान वाहन में तीन लोग सवार मिले। तलाशी में एम्बुलेंस के भीतर शराब छिपाने के लिए बनाया गया गुप्त तहखाना सामने आया। इसी हिस्से में अंग्रेजी शराब की खेप रखी गई थी। वाहन से कुल 388 लीटर शराब बरामद हुई। इसके बाद टीम ने एम्बुलेंस सवार तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस तरह विभाग को मिली सूचना के आधार पर शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई।
इस मामले में शराब छिपाने का तरीका विशेष रूप से सामने आया है। शराब को एम्बुलेंस के भीतर सामान्य ढंग से रखने के बजाय गुप्त तहखाने में छिपाया गया था। इससे स्पष्ट है कि वाहन में शराब रखने के लिए अलग जगह तैयार की गई थी। हालांकि, तहखाना वाहन के किस हिस्से में बनाया गया था और उसकी बनावट कैसी थी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। तलाशी के दौरान छिपी हुई खेप बरामद होने से एम्बुलेंस के जरिए शराब ले जाने का मामला उजागर हुआ।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, शराब हरियाणा से पटना पहुंचाई जा रही थी। बक्सर-पटना फोरलेन पर रतनपुर यात्री शेड के पास हुई कार्रवाई से यह खेप अपने बताए गए गंतव्य तक नहीं पहुंच सकी। हालांकि, हरियाणा में शराब कहां से लादी गई थी और पटना में इसे किस व्यक्ति या स्थान तक पहुंचाना था, इसका विवरण सामने नहीं आया है। बरामद शराब के ब्रांड, बोतलों की संख्या और अनुमानित कीमत की भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल बरामदगी की मात्रा 388 लीटर बताई गई है।
एम्बुलेंस में सवार तीनों लोगों की गिरफ्तारी इस कार्रवाई का दूसरा प्रमुख पहलू है। विभाग की टीम ने वाहन को रोकने और शराब बरामद करने के साथ आरोपियों को भी पकड़ लिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तार लोगों के नाम, उम्र और निवास स्थान का उल्लेख नहीं है। शराब की खेप लाने में तीनों की क्या भूमिका थी तथा वाहन का मालिक कौन है, जैसे तथ्य भी अभी स्पष्ट नहीं हैं। आरोपियों और एम्बुलेंस से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने पर इस मामले की अन्य कड़ियां स्पष्ट हो सकेंगी।
कार्रवाई में सूचना मिलने से लेकर वाहन पकड़े जाने तक विभाग की टीम ने तय स्थान पर घेराबंदी की। सहायक आयुक्त रजनीश को मिली सूचना के बाद निरीक्षक प्रकाश चन्द्र के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था। उसी टीम ने रतनपुर यात्री शेड के पास एम्बुलेंस को रोककर तलाशी ली। इस पूरे घटनाक्रम में गुप्त सूचना महत्वपूर्ण साबित हुई, क्योंकि शराब वाहन के भीतर बनाए गए छिपे हिस्से में रखी थी। तलाशी के बाद ही बरामद खेप और उसे रखने का तरीका सामने आया।
मरीजों की आवाजाही से जुड़े वाहन में शराब मिलने का मामला एम्बुलेंस के दुरुपयोग को भी सामने लाता है। यहां जिस वाहन को पकड़ा गया, वह मारुति सुजुकी ईको एम्बुलेंस थी और उसमें शराब छिपाकर ले जाई जा रही थी। हालांकि, वाहन पर किस संस्था का नाम दर्ज था या उसका संचालन कौन करता था, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए किसी अस्पताल, चिकित्सा संस्था या एम्बुलेंस सेवा से इस मामले का संबंध उपलब्ध विवरण के आधार पर नहीं जोड़ा जा सकता।
इस कार्रवाई के बाद सबसे अहम सवाल शराब की खेप के स्रोत और उसके गंतव्य से जुड़े हैं। हरियाणा से पटना ले जाई जा रही शराब किसके लिए थी और इसे पहुंचाने की व्यवस्था किसने की थी, इसकी जानकारी अभी सामने आनी बाकी है। फिलहाल मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग भोजपुर की टीम ने बक्सर-पटना फोरलेन पर एम्बुलेंस से 388 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रतनपुर यात्री शेड के पास पकड़े गए वाहन में बने गुप्त तहखाने से शराब की बरामदगी इस कार्रवाई का मुख्य तथ्य है।





