मुजफ्फरपुर। जिले में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ गायघाट और बेनीबाद थाना पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए करीब 1100 लीटर विदेशी शराब जब्त की है। कार्रवाई के दौरान एक उपचालक को गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए। बरामद वाहनों के आधार पर पुलिस अब शराब की आपूर्ति से जुड़े लोगों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। दोनों थाना क्षेत्रों में हुई बरामदगी ने शराब के अवैध परिवहन का मामला सामने लाया है।

गायघाट थाना पुलिस ने मुजफ्फरपुर-दरभंगा मुख्य मार्ग पर सतनाम पेट्रोल पंप के समीप गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, एक ट्रक से विदेशी शराब की बड़ी खेप बरामद हुई। यह शराब असम से मोतिहारी ले जाई जा रही थी। ट्रक के अंदर बनाए गए गुप्त तहखाने में शराब छिपाकर रखी गई थी। वाहन की जांच के दौरान यह छिपा हुआ हिस्सा सामने आया और उसमें रखी खेप बरामद कर ली गई।

ट्रक में गुप्त तहखाना बनाए जाने का तथ्य इस कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शराब को सामान्य तौर पर दिखाई देने वाली जगह पर रखने के बजाय वाहन के भीतर छिपाया गया था। इस व्यवस्था के कारण बाहर से देखने पर खेप का पता लगना कठिन हो सकता था। हालांकि, तहखाने की बनावट, आकार और उसे खोलने की प्रक्रिया का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। पुलिस की जांच में शराब छिपाने के इस तरीके की जानकारी सामने आई है।

दोनों कार्रवाइयों को मिलाकर करीब 1100 लीटर विदेशी शराब जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। इस मात्रा को केवल गायघाट में ट्रक से हुई बरामदगी नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि इसमें बेनीबाद थाना क्षेत्र की कार्रवाई भी शामिल है। दोनों स्थानों से अलग-अलग कितनी शराब मिली, इसका स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है। इसलिए कुल बरामदगी और किसी एक वाहन में मिली खेप के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है।

कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किया गया व्यक्ति उपचालक बताया गया है। उसकी पहचान और निवास स्थान का विवरण उपलब्ध नहीं है। शराब के परिवहन में उसकी कथित भूमिका की जांच पुलिस कर रही है। गिरफ्तारी के अलावा उसके किसी बयान या स्वीकारोक्ति की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए उसके नाम से शराब भेजने वालों, खेप के मालिक अथवा उसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बारे में कोई दावा नहीं किया जा सकता।

अन्य आरोपियों के फरार होने के बाद पुलिस के सामने उनकी पहचान और तलाश की चुनौती है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वे पुलिस को चकमा देकर निकल गए। हालांकि, फरार हुए लोगों की संख्या और भागने की परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हैं। घटना को अंधेरे का फायदा उठाने, पीछा करने या किसी अन्य विशेष तरीके से जोड़ने की जानकारी भी नहीं दी गई है। फिलहाल उनके फरार होने और पुलिस द्वारा नेटवर्क का सुराग तलाशने की बात सामने आई है।

बरामद वाहन इस जांच में महत्वपूर्ण आधार बने हैं। पुलिस इनके जरिए शराब के परिवहन से जुड़े लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। वाहन का स्वामित्व, उसका उपयोग और खेप पहुंचाने की व्यवस्था जैसे पहलू इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। लेकिन वाहन मालिक की पहचान सामने आने भर से उसकी आपराधिक भूमिका तय नहीं होती। परिवहन में किस व्यक्ति की क्या जिम्मेदारी थी, यह संबंधित तथ्यों के परीक्षण से स्पष्ट होगा।

असम से मोतिहारी तक खेप ले जाने की जानकारी शराब की आपूर्ति के शुरुआती और अंतिम स्थान की जांच को महत्वपूर्ण बनाती है। पुलिस के सामने यह पता लगाने का विषय है कि शराब किसने भेजी और उसे कहां पहुंचाया जाना था। उपलब्ध जानकारी में किसी आपूर्तिकर्ता या प्राप्तकर्ता का नाम नहीं दिया गया है। इसी तरह बीच के किसी पड़ाव अथवा अन्य वाहन में खेप उतारने की योजना की भी पुष्टि नहीं हुई है।

बेनीबाद थाना पुलिस की कार्रवाई में भी विदेशी शराब की बरामदगी हुई है। हालांकि, इस कार्रवाई का स्थान, वाहन का प्रकार और घटनाक्रम का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। दोनों थाना क्षेत्रों में शराब मिलने की जानकारी से यह स्वतः साबित नहीं होता कि दोनों खेपें एक ही गिरोह की थीं। उनके बीच संबंध था या वे अलग-अलग मामलों से जुड़ी थीं, इसका निर्धारण पुलिस की जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगा।

करीब 1100 लीटर शराब की बरामदगी के बावजूद बोतलों और कार्टन की संख्या, ब्रांड तथा अनुमानित कीमत का विवरण नहीं दिया गया है। इन आंकड़ों का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। बरामद शराब की मात्रा को भी लगभग के रूप में बताया गया है। आगे विस्तृत जब्ती सूची उपलब्ध होने पर दोनों कार्रवाइयों का अलग-अलग ब्योरा स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल खबर का प्रमुख आधार कुल मात्रा, उपचालक की गिरफ्तारी और ट्रक में शराब छिपाने का तरीका है।

गायघाट और बेनीबाद की इन कार्रवाइयों के बाद पुलिस का ध्यान फरार आरोपियों और आपूर्ति से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने पर है। ट्रक के गुप्त तहखाने से मिली खेप ने परिवहन की छिपी व्यवस्था उजागर की है, लेकिन पूरे नेटवर्क की पहचान अभी सामने नहीं आई है। गिरफ्तार उपचालक की कथित भूमिका और बरामद वाहनों से मिलने वाली जानकारी आगे महत्वपूर्ण रहेगी। संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा कि शराब के इस अवैध कारोबार में कौन-कौन शामिल था।

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