कमरों की कमी से बरामदे में पढ़ाई को मजबूर बच्चे

Update: 2026-07-29 09:08 GMT

बिहार, वैशाली: बिदुपुर प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, बिदुपुर कन्या में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। यहां करीब 500 छात्र-छात्राएं जर्जर भवन और कमरों की भारी कमी के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल में पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। जर्जर भवन के कारण छात्र और शिक्षक दोनों हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका में रहते हैं।

बिदुपुर बाजार स्थित इस विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक लगभग 500 बच्चे नामांकित हैं। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए स्कूल परिसर में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पूरे विद्यालय में वर्तमान समय में केवल दो पुराने कमरे उपलब्ध हैं। इनमें से एक कमरे का उपयोग प्रधानाध्यापक कार्यालय के रूप में किया जा रहा है, जबकि दूसरा कमरा भी बच्चों की संख्या के हिसाब से काफी छोटा है।

विद्यालय के कई भवनों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि उनमें बच्चों को बैठाना खतरे से खाली नहीं है। जर्जर दीवारों और कमजोर छत के कारण शिक्षक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। स्कूल परिसर में नए कमरों का निर्माण भी शुरू किया गया था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य अधूरा होने से बच्चों और शिक्षकों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

कमरों की कमी के कारण शिक्षक मजबूरी में बरामदे में कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। स्थिति यह है कि कक्षा एक से तीन तक के बच्चों को एक ही बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। एक साथ कई कक्षाओं के संचालन से शोर-शराबा बढ़ जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। छोटे बच्चों को पढ़ने और समझने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

बारिश के मौसम में स्कूल की स्थिति और खराब हो जाती है। जर्जर छत से पानी टपकने लगता है और कमरों व बरामदे में पानी भर जाता है। कई बार बच्चों और शिक्षकों को बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ता है। बरसात के दिनों में पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। वहीं ठंड के मौसम में भी बच्चे खुले और असुरक्षित स्थानों पर बैठकर पढ़ने को मजबूर होते हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है और स्कूल भवनों के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन बिदुपुर कन्या राजकीय मध्य विद्यालय की स्थिति वर्षों से खराब बनी हुई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान अब तक इस समस्या की ओर नहीं गया है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनय कुमार ने बताया कि स्कूल भवन की जर्जर स्थिति और नए कमरों के निर्माण को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित जानकारी दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि विभाग को समस्या से अवगत कराने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। नए कमरों का निर्माण भी धीमी गति से चल रहा है, जिसके कारण बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। जर्जर भवन में पढ़ाई करना कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द स्कूल भवन की मरम्मत कराई जाए और अधूरे निर्माण कार्य को पूरा कराया जाए, ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित माहौल मिल सके।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर शिक्षा के लिए केवल पढ़ाई की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण भी जरूरी है। यदि बच्चों को लगातार असुरक्षित माहौल में पढ़ना पड़ेगा तो इसका असर उनकी शिक्षा और मानसिक विकास पर पड़ सकता है।

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी जल्दी कदम उठाता है और क्या इन 500 बच्चों को जल्द ही सुरक्षित कक्षाएं मिल पाती हैं या नहीं। फिलहाल बिदुपुर कन्या राजकीय मध्य विद्यालय के छात्र-छात्राएं मजबूरी में बरामदे और जर्जर भवन के बीच अपना भविष्य संवारने की कोशिश कर रहे हैं।

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