पटना। राजधानी के बाजार में रोजमर्रा की जरूरत वाली खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। त्योहारों का मौसम करीब आने के साथ ही घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्थिति यह है कि खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से निर्धारित खुदरा और थोक दरों से भी अधिक कीमत पर चीनी, प्याज और आटा बाजार में बिकने की बात सामने आ रही है।

20 अगस्त को विभाग की ओर से जारी कीमतों और राजधानी के मौजूदा बाजार भाव की तुलना करने पर कई खाद्य वस्तुओं के दाम में उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है। इससे सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी मासिक आय सीमित है और जिनके घरेलू बजट का बड़ा हिस्सा खाने-पीने की आवश्यक वस्तुओं पर खर्च होता है।

विभाग ने तय की थीं थोक और खुदरा दरें

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से 20 अगस्त को आवश्यक खाद्य वस्तुओं के लिए थोक और खुदरा कीमतें निर्धारित की गई थीं। इन दरों का उद्देश्य बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी बनाए रखना और उपभोक्ताओं को अत्यधिक कीमत वसूली से राहत देना है।

विभाग के अनुसार, थोक बाजार में चीनी की कीमत 54 रुपये, प्याज 33 रुपये और आटा 30 रुपये प्रति किलो निर्धारित की गई थी। वहीं, खुदरा बाजार के लिए चीनी की दर 57 रुपये, प्याज 41 रुपये और आटा 34 रुपये प्रति किलो तय की गई थी।

हालांकि, राजधानी के कई बाजारों में इन निर्धारित कीमतों के मुकाबले अधिक दर पर सामान बिकने की शिकायत सामने आ रही है।

त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता

त्योहारों का मौसम नजदीक होने के कारण खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों के दौरान सामान्य दिनों की तुलना में घरों में खाद्य सामग्री की खपत बढ़ जाती है। मिठाइयों और अन्य पकवानों में चीनी, आटा और तेल जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल अधिक होता है।

ऐसे में यदि इन आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ते हैं तो इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को एक ही बजट में अधिक खर्च का सामना करना पड़ रहा है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में कीमतों में लगातार बदलाव के कारण महीने का बजट बनाना मुश्किल हो गया है। पहले से तय रकम में जरूरत का सामान खरीदने के लिए अब कई परिवारों को अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है।

चीनी के दाम ने बढ़ाया दबाव

चीनी रोजमर्रा के इस्तेमाल की महत्वपूर्ण वस्तु है। चाय, मिठाई और घरेलू खाद्य पदार्थों में इसका इस्तेमाल होने के कारण इसकी कीमत बढ़ने का असर लगभग हर परिवार पर पड़ता है।

विभाग ने खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 57 रुपये प्रति किलो तय की है। लेकिन बाजार में इससे अधिक कीमत पर चीनी मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को आशंका है कि मांग बढ़ने के साथ कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।

प्याज की कीमत भी चिंता का कारण

भारतीय रसोई में प्याज का इस्तेमाल लगभग हर दिन होता है। सब्जी, दाल और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में प्याज की जरूरत पड़ती है। इसलिए प्याज की कीमत में वृद्धि का सीधा असर आम परिवारों की रसोई पर पड़ता है।

20 अगस्त की विभागीय दर के अनुसार थोक बाजार में प्याज की कीमत 33 रुपये प्रति किलो, जबकि खुदरा बाजार में 41 रुपये प्रति किलो तय की गई थी। इसके बावजूद राजधानी के बाजार में प्याज इससे अधिक कीमत पर बिकने की बात सामने आ रही है।

प्याज की कीमत बढ़ने से छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी पर सब्जी बेचने वालों पर भी असर पड़ता है। थोक बाजार से महंगा सामान मिलने पर खुदरा विक्रेता भी अपनी कीमत बढ़ाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

आटे की कीमत बढ़ने से भी असर

आटा भी देश के अधिकांश परिवारों के भोजन का मुख्य हिस्सा है। रोटी और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने में इसका रोजाना इस्तेमाल होता है। ऐसे में आटे की कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी महीने के कुल घरेलू खर्च को प्रभावित कर सकती है।

विभाग ने थोक बाजार में आटे की कीमत 30 रुपये प्रति किलो और खुदरा बाजार में 34 रुपये प्रति किलो निर्धारित की थी। लेकिन राजधानी में इससे अधिक कीमत पर आटा बिकने की जानकारी से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है।

बाजार निगरानी की जरूरत

निर्धारित दर और वास्तविक बाजार भाव में अंतर सामने आने के बाद बाजार की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की दर तय की है तो बाजार में इसकी प्रभावी निगरानी भी होनी चाहिए।

व्यापारियों का पक्ष यह हो सकता है कि थोक खरीद कीमत, परिवहन खर्च, भंडारण और अन्य लागत के कारण वास्तविक बिक्री मूल्य में अंतर हो सकता है। लेकिन यदि निर्धारित खुदरा दर से काफी अधिक कीमत वसूली जा रही है, तो इसकी जांच आवश्यक हो जाती है।

आम लोगों की जेब पर सीधा असर

महंगाई का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ता है जिनकी आय में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होती। ऐसे परिवारों को भोजन और अन्य जरूरी खर्चों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

चीनी, प्याज और आटा जैसी वस्तुओं की कीमत बढ़ने से खर्च को कम करना आसान नहीं होता, क्योंकि इन्हें रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल किया जाता है। यही कारण है कि इनकी कीमत में बढ़ोतरी का असर सीधे रसोई के बजट पर दिखाई देता है।

त्योहारों में और बढ़ सकती है मांग

त्योहारों के नजदीक आने के साथ बाजार में खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती होगी कि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखी जाए।

उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि संबंधित विभाग बाजार की नियमित जांच करेगा और निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर सामान बेचने की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई करेगा।

फिलहाल राजधानी के बाजार में खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विभाग की निर्धारित दरों और वास्तविक बाजार भाव के बीच अंतर को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। त्योहारों से पहले यदि बाजार में कीमतों पर नियंत्रण नहीं रहा, तो इसका सीधा असर आम परिवारों की रसोई और मासिक बजट पर पड़ सकता है।

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