दरभंगा। सरकारी स्कूलों की जमीन पर किए गए अतिक्रमण और विद्यार्थियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की कमी अब शिक्षा व्यवस्था के संचालन में बाधा नहीं बनेगी। विद्यालयों की जमीन का सीमांकन कर उसे अतिक्रमणमुक्त कराने के साथ स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली और बेहतर सड़क संपर्क जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल की जाएगी। सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में स्कूलों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में सरकारी विद्यालयों की जमीन की सुरक्षा प्रमुख मुद्दा रही। सांसद ने अधिकारियों से कहा कि जिन स्कूलों की जमीन का अब तक स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है, वहां राजस्व विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता के आधार पर सीमांकन कराया जाए। विद्यालय परिसर की वास्तविक सीमा स्पष्ट होने के बाद अतिक्रमण वाले स्थानों को चिह्नित किया जाए और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए स्कूलों की जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए।
कई सरकारी विद्यालयों के पास पर्याप्त जमीन होने के बावजूद उसका पूरा उपयोग नहीं हो पाता है। कहीं सीमा स्पष्ट नहीं होने से आसपास के लोगों द्वारा जमीन पर अस्थायी या स्थायी निर्माण कर लिया जाता है तो कहीं विद्यालय परिसर के हिस्से का निजी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने लगता है। ऐसी स्थिति में स्कूल के विस्तार, खेल मैदान, अतिरिक्त कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के निर्माण में परेशानी आती है। इसे देखते हुए स्कूलों की जमीन से संबंधित सभी अभिलेखों को व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है।
सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यालयवार जमीन की स्थिति की जानकारी तैयार की जाए। इसमें उपलब्ध भूमि, सीमांकन की स्थिति, अतिक्रमण और उससे संबंधित कार्रवाई का स्पष्ट विवरण शामिल हो। जिन विद्यालयों की जमीन पर विवाद है, उन मामलों में संबंधित विभागों के साथ बैठक कर समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए आवंटित जमीन का उपयोग केवल विद्यार्थियों और विद्यालय के हित में होना चाहिए।
बैठक में स्कूलों तक पहुंचने वाली सड़कों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विद्यालय मुख्य सड़क से सीधे नहीं जुड़े हैं। बरसात के दिनों में कच्चे और खराब रास्तों के कारण विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को स्कूल पहुंचने में कठिनाई होती है। कुछ स्थानों पर जलभराव और कीचड़ की समस्या भी बनी रहती है। सांसद ने ऐसे विद्यालयों की पहचान कर उन्हें मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया।
विद्यालयों को मुख्य सड़क से जोड़ने की पहल से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को फायदा मिलने की उम्मीद है। सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध होने पर विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ सकती है। इसके साथ स्कूल वाहनों, शिक्षकों और आवश्यक शैक्षणिक सामग्री को विद्यालय तक पहुंचाने में भी सुविधा होगी। सांसद ने कहा कि सड़क संपर्क की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को भी समीक्षा बैठक में प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों से कहा गया कि प्रत्येक विद्यालय में पेयजल व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाए। जहां चापाकल, नल या अन्य जलस्रोत खराब हैं, उनकी जल्द मरम्मत कराई जाए। पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। विद्यार्थियों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर न होना पड़े, इसके लिए नियमित रूप से पेयजल व्यवस्था की निगरानी करने का निर्देश दिया गया।
विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति सुधारने पर भी जोर दिया गया। सांसद ने कहा कि केवल शौचालय का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका नियमित उपयोग, सफाई और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग उपयोग योग्य शौचालय होने चाहिए। छात्राओं की सुविधा और स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति के लिए स्वच्छ तथा सुरक्षित शौचालयों की व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
बैठक में बिजली की उपलब्धता और विद्युत उपकरणों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिन विद्यालयों में बिजली का कनेक्शन नहीं है या कनेक्शन होने के बावजूद आपूर्ति बाधित है, वहां समस्या का समाधान कराने को कहा गया। खराब वायरिंग, पंखे, बल्ब और अन्य विद्युत उपकरणों की मरम्मत के लिए भी आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया। विद्यालय में बिजली उपलब्ध होने से गर्मी के दौरान विद्यार्थियों को राहत मिलने के साथ डिजिटल शिक्षा से संबंधित उपकरणों के संचालन में भी मदद मिलेगी।
सांसद ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यालयों की बुनियादी समस्याओं का केवल कागजी आकलन न किया जाए, बल्कि स्कूलों का स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त की जाए। निरीक्षण के दौरान प्रधानाध्यापक, शिक्षक, विद्यार्थियों और विद्यालय प्रबंधन समिति से बातचीत कर स्थानीय समस्याओं को समझा जाए। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना तैयार कर सुविधाओं को दुरुस्त कराया जाए।
उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कहा कि स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों और कमियों का अद्यतन विवरण रखा जाए। इससे यह निर्धारित करने में आसानी होगी कि किस विद्यालय में कौन-सा कार्य सबसे पहले कराया जाना आवश्यक है। जमीन से अतिक्रमण हटाने, रास्ते का निर्माण कराने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा, राजस्व, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, बिजली और सड़क निर्माण से जुड़े विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।
समीक्षा बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। भवन या शिक्षक उपलब्ध होने के बावजूद यदि विद्यालय में पानी, शौचालय, बिजली और पहुंच मार्ग जैसी सुविधाएं नहीं होंगी तो इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ेगा। इसी प्रकार विद्यालय की जमीन सुरक्षित नहीं होने से भविष्य में उसके विकास और विस्तार की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने अधिकारियों से निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्कूलों से जुड़ी समस्याओं की नियमित समीक्षा करने और किए गए कार्यों की प्रगति से अवगत कराने के निर्देश भी दिए। इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन से सरकारी स्कूलों की जमीन को सुरक्षित करने के साथ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होने की उम्मीद है।