पटना। जिले के बाढ़ प्रखंड स्थित एकडंगा पंचायत के प्राथमिक विद्यालय मोगल चक में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा की राह बेहद खतरनाक हो गई है। आजाद नगर महादलित बस्ती के दर्जनों बच्चे विद्यालय आने-जाने के लिए बाढ़ के पानी से भरी महाने नदी को एक अस्थायी जुगाड़ नाव से पार करने को मजबूर हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बच्चों को नदी पार कराने की जिम्मेदारी किसी प्रशिक्षित नाविक के पास नहीं, बल्कि विद्यालय में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाला एक छात्र निभा रहा है।
महाने नदी में पानी की मात्रा अधिक होने के कारण बच्चों की यह दैनिक यात्रा किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। विद्यालय आने और छुट्टी के बाद घर लौटने के दौरान बच्चे एक साथ जुगाड़ से तैयार की गई नाव पर बैठते हैं। इसके बाद पांचवीं का छात्र नाव को एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाता है। छोटे बच्चों से भरी नाव जब नदी के बीच पहुंचती है तो उनकी सुरक्षा के लिए कोई वयस्क, प्रशिक्षित नाविक या बचावकर्मी मौजूद नहीं रहता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आजाद नगर महादलित बस्ती से प्राथमिक विद्यालय मोगल चक तक पहुंचने के लिए बच्चों के पास सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ते का अभाव है। नदी में पानी बढ़ने के बाद सामान्य रास्ते से आवागमन कठिन हो गया है। ऐसे में बस्ती के बच्चे जुगाड़ नाव का सहारा लेकर विद्यालय पहुंच रहे हैं। शिक्षा जारी रखने की उनकी इच्छा मजबूत है, लेकिन बुनियादी सुविधा के अभाव में उन्हें हर दिन जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
विद्यालय की छुट्टी होने पर भी यही स्थिति दिखाई देती है। दर्जनों बच्चे नदी किनारे पहुंचकर अस्थायी नाव पर सवार होते हैं और अपने घर जाने के लिए नदी पार करते हैं। नाव की क्षमता, मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। बच्चों के पास लाइफ जैकेट या अन्य जीवनरक्षक उपकरण भी दिखाई नहीं देते। नाव असंतुलित होने, तेज हवा चलने या पानी का बहाव बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
पांचवीं कक्षा के छात्र द्वारा नाविक की भूमिका निभाना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जिस उम्र में बच्चे को पढ़ाई, खेल और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, उस उम्र में वह अपनी तथा दूसरे विद्यार्थियों की जिंदगी की जिम्मेदारी संभाल रहा है। नाव चलाने में थोड़ी-सी चूक दर्जनों बच्चों की जान खतरे में डाल सकती है। नदी की गहराई और बहाव का अंदाजा लगाने में भी बच्चे से गलती होने की आशंका रहती है।
इस पूरी स्थिति से अभिभावकों की मजबूरी भी सामने आती है। बच्चों की पढ़ाई बंद न हो, इसलिए परिवार उन्हें जोखिम के बावजूद विद्यालय भेज रहे हैं। सुरक्षित रास्ता या नियमित नाव उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके पास जुगाड़ का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। दूसरी ओर, बच्चों को विद्यालय भेजते समय परिजनों के मन में किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय स्तर पर विद्यालय तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारियों में शामिल है। केवल विद्यालय भवन, शिक्षक और किताबें उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यदि विद्यार्थी सुरक्षित तरीके से स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं तो पढ़ाई की पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है। खासकर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को नदी पार करके स्कूल भेजना अत्यंत जोखिमपूर्ण है।
महादलित बस्ती के बच्चों की यह समस्या सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन सुरक्षित आवागमन की सुविधा नहीं होने पर इन योजनाओं का लाभ अधूरा रह जाता है। लगातार खतरा बने रहने से कुछ अभिभावक भविष्य में अपने बच्चों को विद्यालय भेजना बंद भी कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों की उपस्थिति और पढ़ाई दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
महाने नदी में पानी बढ़ने की स्थिति में प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। बच्चों के लिए मजबूत और सुरक्षित नाव उपलब्ध कराने के साथ उस पर प्रशिक्षित नाविक की नियुक्ति आवश्यक है। नाव में क्षमता के अनुसार ही बच्चों को बैठाया जाना चाहिए और प्रत्येक विद्यार्थी के लिए लाइफ जैकेट की व्यवस्था होनी चाहिए। नदी के दोनों किनारों पर जिम्मेदार वयस्कों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसके साथ ही इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सुरक्षित संपर्क मार्ग या पुल के विकल्प पर विचार किया जाना जरूरी है। पानी कम होने के बाद समस्या को भूल जाने से अगले वर्ष फिर यही स्थिति पैदा हो सकती है। संबंधित विभागों को नदी और आसपास के क्षेत्र का सर्वेक्षण कर ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे सभी मौसम में बच्चे बिना खतरे के विद्यालय पहुंच सकें।
विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को बच्चों के नदी पार करने के तरीके की जानकारी संबंधित शिक्षा अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को लिखित रूप से देनी चाहिए। जब तक सुरक्षित व्यवस्था नहीं बनती, बच्चों को अकेले या किसी नाबालिग छात्र की मदद से नाव में यात्रा करने से रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। अभिभावकों के साथ बैठक कर अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था भी बनाई जा सकती है।
घटना सामने आने के बाद अब प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की अपेक्षा की जा रही है। संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाना चाहिए कि बच्चे कब से इस तरह नदी पार कर रहे हैं और उनके लिए अब तक सुरक्षित व्यवस्था क्यों नहीं की गई। मानसून और बाढ़ के दौरान नदी के जलस्तर तथा बहाव में अचानक बदलाव संभव है। इसलिए थोड़ी-सी देरी भी बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
प्राथमिक विद्यालय मोगल चक के विद्यार्थियों का यह जोखिम भरा सफर उनकी पढ़ाई के प्रति लगन को दर्शाता है, लेकिन इसे बहादुरी की कहानी कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार, प्रशासन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। पांचवीं के छात्र के हाथ में नाव की कमान देकर दर्जनों बच्चों को नदी पार कराने की स्थिति तत्काल समाप्त होनी चाहिए। सुरक्षित नाव, प्रशिक्षित नाविक और स्थायी आवागमन व्यवस्था उपलब्ध कराना ही इस गंभीर समस्या का वास्तविक समाधान होगा।