मुजफ्फरपुर। चर्चित ब्रांड के नाम पर कथित रूप से नकली सिगरेट बेचने के अवैध कारोबार का नगर थाना पुलिस ने रविवार को पर्दाफाश किया। वीएसटी इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से मिली शिकायत के आधार पर पुलिस ने धर्मशाला चौक स्थित एक थोक विक्रेता की दुकान पर छापेमारी की। इस दौरान दुकान से करीब 21 हजार से अधिक नकली सिगरेट के पैकेट बरामद किए जाने का दावा किया गया है। जब्त माल की अनुमानित कीमत तीन लाख रुपये से अधिक बताई गई है।

पुलिस ने दुकान संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती पूछताछ में कारोबारी ने कथित तौर पर बताया कि उसने यह माल अहियापुर के जीरोमाइल इलाके में रहने वाले एक युवक से खरीदा था। इस जानकारी के बाद मामले की कड़ियां जीरोमाइल क्षेत्र से जुड़ती दिखाई दे रही हैं। पुलिस अब कथित सप्लायर की पहचान और माल की आपूर्ति से संबंधित जानकारी जुटा रही है।

जानकारी के अनुसार, वीएसटी इंडस्ट्रीज लिमिटेड को बाजार में कंपनी के नाम से नकली उत्पाद बेचे जाने की शिकायत मिली थी। कंपनी की ओर से संबंधित दुकान और वहां रखे उत्पादों के बारे में जानकारी जुटाने के बाद नगर थाने में शिकायत दी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चर्चित ब्रांड के नाम, पैकेजिंग और पहचान का इस्तेमाल कर ग्राहकों को नकली सिगरेट बेची जा रही है।

शिकायत मिलने के बाद नगर थाना पुलिस ने धर्मशाला चौक स्थित थोक विक्रेता की दुकान पर दबिश दी। दुकान की तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में सिगरेट के पैकेट मिले। कंपनी के प्रतिनिधियों ने इन उत्पादों के नकली होने का दावा किया। इसके बाद पुलिस ने पूरे माल को जब्त करते हुए दुकान संचालक को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।

बरामद उत्पाद वास्तव में नकली हैं या नहीं, इसकी अंतिम पुष्टि अधिकृत परीक्षण, कंपनी के रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी। पैकेजिंग, बैच नंबर, निर्माण स्थल, कर संबंधी विवरण और वैधानिक चेतावनी सहित अन्य बिंदुओं की जांच से पता लगाया जा सकता है कि माल कहां तैयार किया गया और उसे बाजार तक किस रास्ते से पहुंचाया गया।

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित नकली सिगरेट की आपूर्ति किस स्तर से हो रही थी। हिरासत में लिए गए कारोबारी ने जिस युवक से माल खरीदने की बात कही है, पुलिस उससे संबंधित जानकारी की पुष्टि कर रही है। आरोपी कारोबारी का बयान अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं है। उसकी सत्यता अन्य साक्ष्यों, लेन-देन के विवरण और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर तय होगी।

जांच के दौरान दुकान के खरीद-बिक्री संबंधी दस्तावेज, मोबाइल फोन, भुगतान रिकॉर्ड और परिवहन से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि माल एक बार ही खरीदा गया था या लंबे समय से इसकी नियमित आपूर्ति हो रही थी। पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर सकती है कि कथित नकली सिगरेट की बिक्री किन दुकानों या क्षेत्रों में की जाती थी।

थोक दुकान से बड़ी मात्रा में माल बरामद होने के कारण इसके पीछे व्यापक आपूर्ति नेटवर्क होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि किसी संगठित गिरोह या बड़े नेटवर्क की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

नकली सिगरेट का कारोबार केवल किसी कंपनी के ब्रांड और कारोबारी हितों को प्रभावित करने तक सीमित नहीं रहता। बिना अधिकृत निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण के तैयार तंबाकू उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा कर सकते हैं। सिगरेट का सेवन स्वयं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, जबकि नकली उत्पादों में इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण प्रक्रिया के बारे में विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं होती।

इसके अलावा नकली उत्पादों की बिक्री से सरकार को कर और राजस्व का नुकसान होने की आशंका रहती है। वैधानिक तरीके से तैयार सिगरेट पर निर्धारित कर, पैकेजिंग मानक और स्वास्थ्य चेतावनियां लागू होती हैं। अवैध रूप से बनाए गए उत्पादों में इन नियमों का पालन नहीं किए जाने की संभावना रहती है। इस कारण ऐसे मामलों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन के साथ कर चोरी और उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी जैसे पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है।

धर्मशाला चौक व्यावसायिक गतिविधियों वाला व्यस्त इलाका है। यहां थोक दुकानों से आसपास के खुदरा विक्रेताओं तक विभिन्न उत्पादों की आपूर्ति होती है। ऐसे स्थान से कथित नकली माल मिलने के बाद यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि उसकी कितनी मात्रा पहले ही बाजार में पहुंच चुकी थी। जिन दुकानदारों को माल बेचा गया हो, उनसे भी पूछताछ या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

कंपनी के नाम और पैकेजिंग से मिलते-जुलते उत्पादों की पहचान आम उपभोक्ता के लिए कठिन हो सकती है। नकली कारोबारी अक्सर पैकेट के रंग, डिजाइन और ब्रांड नाम की नकल कर उत्पाद को असली जैसा दिखाने की कोशिश करते हैं। मामूली कीमत के अंतर या पैकेजिंग में छोटी गड़बड़ी पर ग्राहक ध्यान नहीं दे पाते। इससे नकली माल आसानी से बाजार में खपाया जा सकता है।

फिलहाल दुकान संचालक से पूछताछ जारी है और कथित सप्लायर की तलाश की जा रही है। जब्त माल का सत्यापन होने तथा आपूर्ति की कड़ी सामने आने के बाद मामले का दायरा बढ़ सकता है। कारोबारी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद निर्धारित होगी। हिरासत या पूछताछ को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।

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