
पटना। बिहार में बाढ़ से पैदा हुए हालात को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को केंद्र सरकार पर बाढ़ राहत के मामले में बिहार के साथ “सौतेली मां जैसा व्यवहार” करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश से केंद्र सरकार में शामिल मंत्रियों को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि वे बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विशेष राहत पैकेज दिलाने में नाकाम रहे हैं।
पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के अनेक क्षेत्रों में बाढ़ के कारण लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार की तरफ से राज्य को अपेक्षित मदद नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों में प्राकृतिक आपदा आने पर केंद्र तुरंत सक्रिय हो जाता है, जबकि बिहार के मामले में ऐसी तत्परता दिखाई नहीं देती।
तेजस्वी यादव ने गुजरात का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जब भी गुजरात में बाढ़ आती है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तुरंत राहत का भरोसा देते हैं, राज्य के नेताओं से बात करते हैं और भारतीय वायुसेना सहित राहत बलों को तैनात करने का निर्देश देते हैं। लेकिन बिहार के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार किया जाता है। यहां वे चुनाव प्रचार के दौरान आते हैं और लिट्टी-चोखा खाते हैं।”
राजद नेता ने आरोप लगाया कि बिहार का इस्तेमाल केवल चुनावी राजनीति के लिए किया जाता है। चुनाव के समय बड़े नेता राज्य का दौरा करते हैं, स्थानीय संस्कृति और खानपान की चर्चा करते हैं तथा विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन संकट आने पर राज्य को पर्याप्त आर्थिक और प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदा के समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रभावित लोगों की सहायता की जानी चाहिए।
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि राज्य सरकार बाढ़ से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराने में सफल नहीं हुई है। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री और प्रदेश के केंद्रीय मंत्रियों ने केंद्र के सामने बिहार के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग प्रभावी तरीके से क्यों नहीं रखी।
विपक्ष के नेता के अनुसार, बिहार से कई नेता केंद्र सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में उनसे अपेक्षा थी कि वे प्रधानमंत्री और संबंधित मंत्रालयों के सामने राज्य की स्थिति को मजबूती से रखेंगे। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री बिहार के हितों की रक्षा करने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं। हालांकि केंद्र या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया का उल्लेख सामने नहीं आया है।
तेजस्वी यादव ने इससे पहले भी प्रधानमंत्री से बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और राहत एवं पुनर्वास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग की थी। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने ₹5,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग उठाई थी। ताजा प्रेस वार्ता में उन्होंने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए प्रभावित परिवारों तक तत्काल सहायता पहुंचाने पर जोर दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया
राजद नेता ने कहा कि बाढ़ केवल कुछ दिनों की समस्या नहीं होती। इसका असर किसानों की फसलों, पशुधन, ग्रामीण सड़कों, मकानों, विद्यालयों और स्थानीय रोजगार पर लंबे समय तक रहता है। पानी कम होने के बाद भी प्रभावित परिवारों के सामने भोजन, स्वच्छ पेयजल, इलाज और घरों की मरम्मत जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। इसलिए राहत के साथ पुनर्वास की ठोस व्यवस्था करना जरूरी है।
उन्होंने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, दवाइयां, स्वच्छ पानी, पशुओं के चारे और अस्थायी आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। साथ ही फसलों और मकानों को हुए नुकसान का आकलन कर पीड़ित परिवारों को समयबद्ध तरीके से मुआवजा दिया जाए। तेजस्वी के मुताबिक राहत वितरण में पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी पात्र परिवार को सहायता से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
बिहार में बाढ़ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ रहे हैं। विपक्ष राहत कार्यों को अपर्याप्त बताते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगा रहा है। वहीं सरकार की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में राहत शिविर, बचाव कार्य और आवश्यक सामग्री पहुंचाने के प्रयास किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं। तेजस्वी के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय प्रभावित नागरिकों की मदद करना केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की जिम्मेदारी है। बिहार को राहत देने में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से केंद्र के सामने राज्य का पक्ष मजबूती से रखने और विशेष पैकेज हासिल करने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को बयानबाजी के बजाय जमीन पर राहत कार्यों की गति बढ़ानी चाहिए। बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल तेजस्वी यादव के आरोपों और मांगों ने बिहार की बाढ़ राहत व्यवस्था तथा केंद्र से मिलने वाली सहायता को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। उनके “सौतेले व्यवहार” वाले आरोप पर केंद्र और राज्य सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।





