बिहार में पुलिस अधिकारियों को दंडाधिकारी की शक्ति

Update: 2026-08-11 03:51 GMT

पटना। बिहार सरकार ने पर्व-त्योहारों के दौरान निकलने वाले जुलूस, मेले और अन्य धार्मिक एवं सार्वजनिक आयोजनों में विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त अधिकार प्रदान किए हैं। सरकार ने रेंज और प्रक्षेत्र में पदस्थापित आईजी और डीआईजी समेत जिलों के एसएसपी, एसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्रदान की हैं। इस संबंध में गृह विभाग की आरक्षी शाखा की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है।

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य पर्व-त्योहारों के दौरान होने वाले बड़े आयोजनों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावी ढंग से संभालना है। मेले और जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के कारण प्रशासन के सामने यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और किसी भी संभावित विवाद को रोकने जैसी कई चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां मिलने से मौके पर त्वरित निर्णय लेने और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करने में सुविधा होगी।

आईजी और डीआईजी समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अधिकार

गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार रेंज और प्रक्षेत्र में पदस्थापित आईजी और डीआईजी को यह अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही जिलों में तैनात एसएसपी, एसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी को भी विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्रदान की गई हैं। हालांकि, ग्रामीण एसपी के मामले में रेलवे से संबंधित पदों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है।

इस व्यवस्था के तहत संबंधित पुलिस अधिकारी पर्व-त्योहारों के दौरान अपने क्षेत्र में विधि-व्यवस्था की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा सकेंगे। विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां मिलने से पुलिस अधिकारियों को केवल पुलिसिंग तक सीमित न रहकर कानून-व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रशासनिक अधिकारों का भी इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा।

पर्व-त्योहारों के दौरान बढ़ती है चुनौती

बिहार में वर्षभर विभिन्न पर्व और त्योहारों के मौके पर मेले, धार्मिक आयोजन और जुलूस निकाले जाते हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आम लोग शामिल होते हैं। कई स्थानों पर जुलूस के मार्ग को लेकर भीड़ और यातायात का दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।

किसी भी आयोजन के दौरान छोटी सी घटना भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है। ऐसे में मौके पर मौजूद अधिकारियों के लिए त्वरित निर्णय लेना महत्वपूर्ण होता है। सरकार ने इसी आवश्यकता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां देने का निर्णय लिया है।

भीड़ प्रबंधन और विधि-व्यवस्था पर रहेगा जोर

पर्व-त्योहारों के दौरान सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होती है। बड़े मेले और जुलूस के दौरान सड़कों पर भीड़ बढ़ने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा जुलूस के मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और संवेदनशील स्थानों की निगरानी भी प्रशासन की प्राथमिकता रहती है।

अब संबंधित पुलिस अधिकारियों के पास विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां होने से ऐसी परिस्थितियों में प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी। इससे कानून-व्यवस्था से संबंधित निर्णय लेने में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय स्तर पर मजबूत होगी व्यवस्था

सरकार के इस फैसले से जिले और रेंज स्तर पर विधि-व्यवस्था की निगरानी और मजबूत होने की उम्मीद है। आईजी और डीआईजी अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर सकेंगे, जबकि एसएसपी और एसपी जिला स्तर पर मेले और जुलूस के दौरान आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी भी अपने क्षेत्राधिकार में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने में भूमिका निभाएंगे।

इस व्यवस्था के जरिए पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिल सकती है। पर्व-त्योहारों से पहले संवेदनशील स्थानों की पहचान, जुलूस के मार्ग की समीक्षा, भीड़ नियंत्रण की योजना और सुरक्षा इंतजामों को लेकर अधिकारियों को पहले से तैयारी करने में सुविधा होगी।

रेलवे क्षेत्र को रखा गया अलग

अधिसूचना में ग्रामीण एसपी के संबंध में विशेष प्रावधान किया गया है। ग्रामीण एसपी को दी गई शक्तियों में रेलवे से जुड़े पदों को शामिल नहीं किया गया है। यानी यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्र में तैनात संबंधित पुलिस अधिकारियों पर लागू होगी, लेकिन रेलवे से संबंधित ग्रामीण एसपी के पद इससे बाहर रहेंगे।

सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब पर्व-त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है। त्योहारों के मौके पर भीड़ बढ़ने के साथ ही जुलूस और मेलों की संख्या भी बढ़ जाती है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त अधिकार देने से कानून-व्यवस्था संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है।

त्वरित कार्रवाई पर रहेगा जोर

सरकार के इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति को समय रहते नियंत्रित करना और पर्व-त्योहारों के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना है। विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियों के कारण वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौके पर आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने में अधिक सुविधा होगी।

गृह विभाग (आरक्षी शाखा) की अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह व्यवस्था प्रभावी हो गई है। अब पर्व-त्योहारों के दौरान होने वाले मेलों और जुलूसों में पुलिस की भूमिका के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों के प्रशासनिक अधिकार भी महत्वपूर्ण होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने की कार्रवाई और अधिक प्रभावी एवं त्वरित हो सकेगी।

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