Bihar बिहार: भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने हाल ही में उनके कथित बयान को लेकर उठे ‘गिराल’ विवाद पर साफ़ सफाई दी। सांसद ने कहा, “No, no, no, I didn’t say Giral, I said Koodal. See, it’s a matter of Holi, the fun of Holi is there. In Holi, we don’t call anything as taunt. This is a very old saying.”
मनोज तिवारी के इस बयान का मतलब यह है कि उन्होंने किसी को लेकर अपमानजनक शब्द नहीं कहा। सांसद ने बताया कि उनका संदर्भ केवल होली के त्योहार की मस्ती और पारंपरिक कहावत तक सीमित था। उन्होंने कहा कि होली के अवसर पर जो मज़ाक या चुटकुले होते हैं, उन्हें ताना कहना गलत होगा, क्योंकि यह परंपरा का हिस्सा है।
सांसद की यह सफाई मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर हुई गलत व्याख्याओं के बाद आई। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय या व्यक्ति को अपमानित करना नहीं था।
मनोज तिवारी ने यह भी कहा कि होली जैसे त्योहारों में पारंपरिक मज़ाक और कहावतें प्राचीन हैं, और इसका राजनीतिक या सामाजिक ताने-बाने से कोई संबंध नहीं है। उनका यह बयान सांस्कृतिक संदर्भ को स्पष्ट करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सांसद की यह सफाई समय पर दी गई प्रतिक्रिया थी, जिससे विवाद को बढ़ने से रोका जा सके। सांसद ने उम्मीद जताई कि लोग उनके शब्दों को संदर्भ और पारंपरिक मस्ती के दृष्टिकोण से समझेंगे, और इस मामले को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाएंगे। इस घटना के बाद बिहार में होली के त्योहार और सार्वजनिक समारोहों में सांसदों और नेताओं के भाषणों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर भी चर्चा शुरू हो गई है।