Lifestyle लाइफ स्टाइल : गांव-देहात के पुराने घरों में दरवाजे की चौखट यानी देहरी जमीन से लगभग 4-5 इंच ऊंची बनाई जाती थी। लोग इसे लांघकर ही घर के अंदर प्रवेश करते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे आमतौर पर देहरी कहा जाता था, लेकिन आधुनिक समय में इस तरह की ऊंची चौखट अब बहुत कम देखने को मिलती है।
पुराने समय में घरों की बनावट और जीवनशैली अलग थी, इसलिए चौखट को ऊंचा रखने के पीछे कई व्यावहारिक कारण थे। सबसे बड़ा कारण सुरक्षा से जुड़ा था। उस समय अधिकतर घर कच्चे होते थे और उनके आसपास खेत, झाड़ियां और जंगल जैसी स्थिति रहती थी। ऐसे में सांप, बिच्छू, कनखजूरे और अन्य कीड़े-मकौड़ों के घर में घुसने का खतरा बना रहता था। ऊंची चौखट इन जीवों के लिए एक प्राकृतिक बाधा का काम करती थी, जिससे वे आसानी से अंदर प्रवेश नहीं कर पाते थे।
इसके अलावा बारिश के मौसम में पानी के घर में आने की संभावना भी रहती थी। गांवों में जल निकासी की व्यवस्था कमजोर होने के कारण थोड़ी ऊंची चौखट पानी को रोकने में मदद करती थी और घर के अंदर का हिस्सा सुरक्षित रहता था।
धूल और मिट्टी से बचाव भी इसका एक बड़ा कारण था। कच्ची गलियों और खेतों के बीच बने घरों में धूल आसानी से अंदर आ जाती थी, जिसे ऊंची चौखट कुछ हद तक रोक देती थी।
धार्मिक और परंपरागत मान्यताओं के अनुसार भी चौखट का विशेष महत्व माना जाता था। इसे घर की सीमा और पवित्रता का प्रतीक समझा जाता था और लोग इसका सम्मान करते थे।
आज के समय में पक्के मकान, टाइल्स और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम के कारण इस तरह की ऊंची चौखट की जरूरत नहीं रह गई है, इसलिए अब अधिकतर घरों में समतल दरवाजे बनाए जाते हैं।