लाइफ स्टाइल : बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है और लोगों को सुहावना लगता है, वहीं इस दौरान कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। जगह-जगह पानी जमा होने, दूषित पानी और खाने की वजह से संक्रमण तेजी से फैल सकता है। बारिश के मौसम में टाइफाइड भी एक ऐसी बीमारी है, जिसके मामले बढ़ने का खतरा रहता है। टाइफाइड एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और संक्रमित भोजन के सेवन से फैल सकता है। इस बीमारी में लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, पेट दर्द, भूख कम लगना, दस्त या कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
टाइफाइड होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर उचित इलाज कराना जरूरी है। केवल दवाइयां लेना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि इस दौरान खान-पान, आराम, पानी और साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। शरीर को संक्रमण से उबरने में समय लगता है, इसलिए रिकवरी के दौरान कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना फायदेमंद हो सकता है।
टाइफाइड के दौरान सबसे जरूरी चीजों में पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना शामिल है। तेज बुखार, पसीना, दस्त या उल्टी की स्थिति में शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए। सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी लेते रहें। पानी के अलावा डॉक्टर की सलाह के अनुसार नारियल पानी, हल्का सूप, छाछ या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं। अगर दस्त या उल्टी ज्यादा हो रही है तो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट की कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस जैसे घोल का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जा सकता है।
रिकवरी के दौरान भोजन भी हल्का और आसानी से पचने वाला रखना बेहतर रहता है। टाइफाइड में कमजोरी और भूख कम लगने की समस्या आम हो सकती है। ऐसे में बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी खाना खाने से बचना चाहिए। दलिया, खिचड़ी और हल्का घर का बना भोजन बेहतर विकल्प हो सकते हैं। जरूरत के अनुसार रोटी के साथ लौकी, तोरई जैसी हल्की सब्जियों का सेवन किया जा सकता है। भोजन कम मात्रा में लेकिन जरूरत के अनुसार कई बार लिया जा सकता है। शरीर को पर्याप्त पोषण देने के लिए डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह भी ली जा सकती है।
टाइफाइड से रिकवरी में पर्याप्त आराम की भी अहम भूमिका होती है। बीमारी के दौरान शरीर संक्रमण से लड़ने में ऊर्जा खर्च करता है, इसलिए अत्यधिक शारीरिक मेहनत करने से कमजोरी बढ़ सकती है। अगर किसी व्यक्ति का काम ज्यादा मेहनत वाला है तो बीमारी के दौरान पर्याप्त आराम करना बेहतर है। शरीर की स्थिति में सुधार आने के बाद ही धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों की ओर लौटना चाहिए।
दवाइयों को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। टाइफाइड के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा जो दवाइयां निर्धारित की गई हैं, उन्हें सही समय पर लेना जरूरी है। खासतौर पर अगर एंटीबायोटिक दी गई है तो डॉक्टर की सलाह के बिना उसे बीच में बंद नहीं करना चाहिए। कुछ लोगों को दवा शुरू करने के बाद बुखार कम होने पर लगता है कि बीमारी ठीक हो गई है और वे दवा लेना बंद कर देते हैं। ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। दवा की अवधि और मात्रा डॉक्टर के निर्देश के अनुसार ही रखनी चाहिए।
साफ-सफाई का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। टाइफाइड दूषित भोजन और पानी से फैल सकता है, इसलिए हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना चाहिए। खाना खाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद हाथ जरूर साफ करें। पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। बाहर का खुले में रखा भोजन खाने से बचना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
टाइफाइड से ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक कमजोरी महसूस हो सकती है। इसलिए अचानक सामान्य से ज्यादा काम या व्यायाम शुरू करने के बजाय शरीर को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आने का समय देना चाहिए। अगर बुखार लगातार बना रहे, बहुत ज्यादा कमजोरी हो, लगातार उल्टी या दस्त हों, पेट में तेज दर्द हो या शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बारिश के मौसम में टाइफाइड समेत कई संक्रमणों से बचाव के लिए सुरक्षित पानी, साफ भोजन, हाथों की स्वच्छता और आसपास सफाई रखना बेहद जरूरी है। बीमारी होने पर घरेलू उपायों के भरोसे रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह से इलाज कराना चाहिए और दवाइयों के साथ पर्याप्त आराम व संतुलित डाइट को भी अपनी रिकवरी का हिस्सा बनाना चाहिए।
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