लाइफ स्टाइल : आजकल स्वस्थ रहने के लिए लोग अपनी डाइट में पंपकिन, चिया, फ्लैक्स, सनफ्लावर और हलीम जैसे बीज शामिल कर रहे हैं। अलसी और तिल भारतीय खानपान का लंबे समय से हिस्सा रहे हैं, जबकि चिया और पंपकिन सीड्स का इस्तेमाल हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। ये बीज फाइबर, प्रोटीन, हेल्दी फैट, मैग्नीशियम, जिंक और दूसरे पोषक तत्व उपलब्ध करा सकते हैं। हालांकि इन्हें खाने का तरीका इनके स्वाद, पाचन और पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है।
न्यूट्रिशनिस्ट सोनिया नारंग ने विभिन्न बीजों को खाने के तरीके साझा किए हैं। उनका कहना है कि सभी बीजों को एक ही तरीके से खाना सही नहीं है। कुछ को पीसना, कुछ को भिगोना और कुछ को हल्का भूनना बेहतर हो सकता है।
 पंपकिन सीड्स को हल्का भूनकर खाएं
कद्दू के बीज यानी पंपकिन सीड्स में प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और हेल्दी फैट पाए जाते हैं। इन्हें धीमी आंच पर हल्का भूनकर खाया जा सकता है। इससे बीज कुरकुरे और पचाने में आसान हो सकते हैं। हालांकि इन्हें तेज आंच पर ज्यादा देर तक भूनने से बचना चाहिए। नमक वाले पैकेटबंद बीज लेते समय लेबल जरूर देखें, क्योंकि उनमें सोडियम अधिक हो सकता है।
अलसी को पीसना हो सकता है बेहतर
अलसी के छोटे और कठोर बीज कई बार साबुत ही पाचन तंत्र से बाहर निकल सकते हैं। इसलिए न्यूट्रिशनिस्ट इन्हें पीसकर खाने की सलाह देती हैं। अलसी के पाउडर को आटे, दही, दलिया या लड्डू में मिलाया जा सकता है। पीसी हुई अलसी को हवा बंद डिब्बे में रखकर फ्रिज में रखना बेहतर है, क्योंकि इसमें मौजूद वसा हवा और गर्मी के संपर्क में जल्दी खराब हो सकती है।
 चिया सीड्स को भिगोना जरूरी
चिया सीड्स पानी सोखकर फूल जाते हैं और जेल जैसा रूप ले लेते हैं। इन्हें पानी, दूध या दही में भिगोकर खाना सुविधाजनक और सुरक्षित माना जाता है। तीन से चार घंटे या रातभर भिगोए हुए चिया सीड्स को नाश्ते या स्मूदी में शामिल किया जा सकता है। सूखे चिया बीज अकेले निगलने से बचना चाहिए, विशेषकर निगलने में परेशानी वाले लोगों को। हार्वर्ड के अनुसार, चिया बीज तेजी से तरल सोखते हैं, इसलिए उन्हें पहले भिगोकर या नम खाद्य पदार्थ के साथ लेना उचित है। 
 तिल का तड़का या पिसा रूप
तिल में कैल्शियम के साथ वसा, प्रोटीन और दूसरे खनिज पाए जाते हैं। इन्हें हल्का भूनकर, तड़के में डालकर या पीसकर चटनी के रूप में खाया जा सकता है। तिल की चटनी और पारंपरिक तिल के लड्डू भी इसके सेवन के सामान्य तरीके हैं। हालांकि हड्डियों की मजबूती के लिए केवल तिल पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन डी और व्यायाम भी जरूरी हैं।
हलीम के बीज रातभर भिगोएं
हलीम या अलीव सीड्स को पानी या दूध में रातभर भिगोकर सुबह लिया जा सकता है। इन्हें खीर और लड्डू में भी इस्तेमाल किया जाता है। ये आयरन सहित कई पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं, लेकिन एनीमिया या हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज केवल इनके भरोसे नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच और उपचार कराना जरूरी है।
 सनफ्लावर सीड्स कच्चे या हल्के भुने
सूरजमुखी के बीज कच्चे अथवा हल्के भुने हुए खाए जा सकते हैं। इनमें विटामिन ई, मैग्नीशियम और असंतृप्त वसा होती है। अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, लगभग 28 ग्राम सूखे भुने सूरजमुखी बीज करीब 49 प्रतिशत दैनिक विटामिन ई उपलब्ध करा सकते हैं। 
बीज पौष्टिक हैं, लेकिन कैलोरी भी देते हैं। इसलिए सामान्यतः सीमित मात्रा में अलग-अलग बीज लेना बेहतर है। एलर्जी, पाचन संबंधी बीमारी या रक्त पतला करने वाली दवाएं लेने वाले लोग इन्हें नियमित आहार में शामिल करने से पहले चिकित्सक या योग्य आहार विशेषज्ञ से सलाह लें।
Tags: