श्री गडकरी प्रयोगवादी मन्त्री भी हैं जो लगातार बेहतरी के लिए प्रयोग करना जरूरी समझते हैं। उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र नागपुर में बिजली से चलने वाली बस चला कर पूरे देश में इसका प्रचलन बढ़ाया और आज हालात यह हैं कि प. बंगाल का कोलकाता शहर इस क्षेत्र में दुनिया के छह बड़े शहरों में से एक है। वह जब नया मोटर वाहन कानून लाये तो कई राज्यों ने इसका विरोध भी किया परन्तु उनकी मंशा साफ थी कि भारत में सड़कों पर यातायात सुरक्षित व नियन्त्रित तरीके से हो और सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या कम से कम हो। वाहन चालकों में आदमी की जान की कीमत का महत्व इस तरह बने कि वह 'स्व नियन्त्रण' को सुरक्षाचक्र की भांति ले। जहां तक पुराने मोटर वाहनों को सड़कों से दूर करने और इन्हें कबाड़ या स्क्रैप में तब्दील करने की नीति का सवाल है तो श्री गडकरी ने साफ कर दिया है कि 15 साल पुराने वाणिज्यिक व 20 साल पुराने निजी वाहनों को अब सड़क पर तभी चलाया जा सकेगा जब वे 'फिटनेस सर्टिफिकेट' (चालन दक्षता प्रमाणपत्र) ले लेंगे ।
नये नियमों के तहत इस प्रमाणपत्र को प्राप्त करने की फीस बीस गुना अधिक तक हो सकती है। इसका मतलब यही निकलता है कि श्री गडकरी पुराने वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट लेने के लिए प्रेरित करने के बजाय उन्हें स्क्रैप में तब्दील करने को प्रेरित करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने ऐसा नीति घोषित की है जिससे पुराने वाहनों के मालिक नये वाहन खरीदने को स्वतः प्रेरित होंगे।
मसलन अपने पुराने वाहन को स्क्रैप में तब्दील कराने का सबूत हासिल करने वाले व्यक्ति को नया वाहन पांच प्रतिशत कम दाम पर कम्पनी से ही मिलेगा। (इसके लिए गडकरी मोटर कम्पनियों से बात कर रहे हैं) और बैंकों से वित्तीय मदद के रास्ते खुले रहेंगे। उम्मीद की जा रही है कि अपने पुराने वाहनों को स्क्रैप में तब्दील करने वाले वाहन मालिकों को बैंक और अधिक सुगमता से कर्ज देंगे। इसके साथ ही राज्य सरकारों से परिवहन मन्त्री बात कर रहे हैं कि वे स्क्रैप सबूत रखने वाले वाहन मालिकों को सड़क कर (रोड टैक्स) में 25 प्रतिशत की छूट दें और पंजीकरण फीस भी माफ कर दें।
श्री गडकरी ने नये वाहनों की खरीद पर जीएसटी की दरें भी कम करने की अपील की है। ये सब फैसले श्री गडकरी इसीलिए ले रहे हैं जिससे भविष्य में वायु प्रदूषण कम से कम हो सके और पेट्रोल ईंधन खर्च भी किफायती हो सके। इसके लिए पूरे देश में वाहनों को कबाड़ में तब्दील करने वाले समन्वित केन्द्र स्थापित किये जायेंगे। ऐसा पहला केन्द्र गुजरात के 'अलंग' में बनेगा जो पहले से ही पुराने पानी के जहाजों को कबाड़ में तब्दील करने का एक केन्द्र है। इस नीति की शुरूआत श्री गडकरी सबसे पहले सरकार द्वारा प्रयोग किये जा रहे वाहनों से ही करेंगे जिससे निजी क्षेत्र के लोग प्रेरणा ले सकें। फिलहाल विभिन्न सरकारी विभागों के पास दो लाख 37 हजार ऐसा वाहन हैं जो 15 साल पुराने हैं।
अप्रैल 2022 से इनका कबाड़ीकरण शुरू हो जायेगा और इनके स्थान पर नये वाहन खरीदे जायेंगे। इस नई नीति से एक तरफ मोटर वाहन उद्योग में कम से कम दस हजार करोड़ रुपए का नया निवेश होगा, वहीं साथ में 35 हजार के लगभग लोगों को रोजगार मिलेगा। परन्तु 2015 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 'नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल' ने फैसला देकर कहा था कि दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों में दस साल से पुराने डीजल वाहन और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन निश्चित तिथि के बाद नहीं चलेंगे। अब श्री गडकरी नये नियम लेकर आये हैं । ये नियम संसद बना रही है अतः देश की सर्वोच्च संस्था द्वारा बनाये गये नियम पुराने नियमों को पार कर जायेंगे या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। श्री गडकरी नयी स्क्रैप नीति नये मोटर वाहन कानून के घेरे में लाये हैं और यह कानून पूरे देश में लागू हो चुका है तो नई स्क्रैप नीति भी पूरे देश मे लागू होनी चाहिए। सामान्य तर्क यही कहता है।