नई दिल्ली। देश के चार हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद 14 न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड और कर्नाटक हाई कोर्ट में जज तथा अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किया है। इनमें सबसे अधिक सात नियुक्तियां दिल्ली हाई कोर्ट में हुई हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को इन नियुक्तियों की आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
इन सभी नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर 2026 की बैठक में की थी। नियुक्त किए गए 14 न्यायिक अधिकारियों में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। नई नियुक्तियों से संबंधित हाई कोर्ट में रिक्तियों को कम करने और लंबित मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली हाई कोर्ट में सात नियुक्तियां
केंद्र की अधिसूचना के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट में सात न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। इनमें निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना को दिल्ली हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है। वहीं संजय शर्मा, भरत पाराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज को अतिरिक्त जज बनाया गया है।
इन नियुक्तियों के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की कार्यरत संख्या बढ़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 60 है और नई नियुक्तियों से पहले यहां 44 जज कार्यरत थे। सात नए जजों के पदभार ग्रहण करने के बाद कार्यरत संख्या 51 हो जाएगी और नौ पद रिक्त रहेंगे।
दिल्ली हाई कोर्ट की नियुक्तियों में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कुल आठ न्यायिक अधिकारियों के नाम की सिफारिश की थी, जबकि केंद्र की 19 सितंबर की अधिसूचना में सात नाम शामिल किए गए हैं। कॉलेजियम की सूची में गुरविंदर पाल सिंह का नाम भी शामिल था, लेकिन मौजूदा अधिसूचना में उनकी नियुक्ति नहीं हुई है।
नई नियुक्तियों में शामिल अरुण भारद्वाज दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के रूप में कार्यरत रहे हैं, जबकि भरत पाराशर सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल हैं। निशा सहाय सक्सेना रोहिणी नॉर्थ-वेस्ट जिले की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और संजय शर्मा कड़कड़डूमा नॉर्थ-ईस्ट जिले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे हैं। दिनेश भट्ट राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रधान जिला न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) सीबीआई के रूप में कार्यरत रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में एक नियुक्ति
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के लिए न्यायिक अधिकारी यश पाल बोर्नी को जज नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम की भी 10 सितंबर को सिफारिश की थी। केंद्र की मंजूरी और राष्ट्रपति की नियुक्ति के बाद अब वह हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
झारखंड हाई कोर्ट को मिले तीन नए जज
झारखंड हाई कोर्ट में तीन न्यायिक अधिकारियों को जज बनाया गया है। इनमें मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा शामिल हैं। तीनों नामों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मंजूरी के बाद केंद्र के पास भेजा गया था और अब राष्ट्रपति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
इन नियुक्तियों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि देश के अलग-अलग हाई कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरना लंबित मामलों के निपटारे से जुड़ी व्यापक न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
हालांकि केवल नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से लंबित मामलों की समस्या समाप्त नहीं होती। अदालतों में उपलब्ध बुनियादी ढांचा, अधीनस्थ न्यायपालिका की स्थिति, मुकदमों की संख्या, प्रक्रिया और न्यायिक प्रशासन सहित कई अन्य कारक भी मामलों के निपटारे की गति को प्रभावित करते हैं।
कर्नाटक हाई कोर्ट में तीन अतिरिक्त जज
कर्नाटक हाई कोर्ट में तीन न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया है। इनमें उषा रानी, केएस भरत कुमार और नेराले वी. भवानी शामिल हैं। केंद्र सरकार की अधिसूचना में इन तीनों की नियुक्ति अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में की गई है।
इस तरह कुल 14 नियुक्तियों में दिल्ली हाई कोर्ट को सात, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट को एक, झारखंड हाई कोर्ट को तीन और कर्नाटक हाई कोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिले हैं।
पांच महिला न्यायिक अधिकारी भी शामिल
नई नियुक्तियों में महिला न्यायिक अधिकारियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। नियुक्त किए गए 14 अधिकारियों में पांच महिलाएं हैं। इनमें दिल्ली हाई कोर्ट के लिए निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना और डॉ. अदिति चौधरी तथा कर्नाटक हाई कोर्ट के लिए उषा रानी और नेराले वी. भवानी शामिल हैं।
न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। ऐसे में नई नियुक्तियों में पांच महिला न्यायिक अधिकारियों का शामिल होना उच्च न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
कैसे होती है हाई कोर्ट के जज की नियुक्ति?
हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत होती है। राष्ट्रपति संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और परामर्श के बाद नियुक्ति करते हैं। मौजूदा 14 नियुक्तियों के मामले में कानून मंत्रालय ने कहा है कि संविधान से प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए और भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति ने नियुक्तियों को मंजूरी दी है।
हाई कोर्ट में नियुक्ति की प्रक्रिया में संबंधित हाई कोर्ट के कॉलेजियम से प्रस्ताव आगे बढ़ता है। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर विचार और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद नाम केंद्र सरकार के पास जाते हैं। संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति की अधिसूचना जारी होती है।
न्यायिक अधिकारियों के अलावा अधिवक्ताओं को भी निर्धारित पात्रता और प्रक्रिया के तहत हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। मौजूदा नियुक्तियों में सभी 14 नाम न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारियों के हैं।
जज और अतिरिक्त जज में क्या अंतर?
नई सूची में कुछ अधिकारियों को जज और कुछ को अतिरिक्त जज बनाया गया है। हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति आमतौर पर सीमित अवधि के लिए होती है। बाद में संवैधानिक प्रक्रिया और सिफारिश के आधार पर उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।
दिल्ली हाई कोर्ट में इस बार दो जज और पांच अतिरिक्त जज नियुक्त हुए हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में एक जज, झारखंड में तीन जज तथा कर्नाटक हाई कोर्ट में तीन अतिरिक्त जज नियुक्त किए गए हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त की गई डॉ. अदिति चौधरी का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से 23 अप्रैल 2028 तक निर्धारित किया गया है।
रिक्त पदों को भरने की दिशा में अहम कदम
देश के हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के रिक्त पद न्यायिक व्यवस्था के सामने महत्वपूर्ण चुनौती रहे हैं। बड़ी संख्या में मामलों के लंबित होने के बीच समय पर नियुक्तियों की आवश्यकता लगातार महसूस की जाती है। नई नियुक्तियों से चार हाई कोर्ट में उपलब्ध न्यायिक संख्या बढ़ेगी।
विशेष रूप से दिल्ली हाई कोर्ट में एक साथ सात न्यायाधीशों की नियुक्ति महत्वपूर्ण है। दिल्ली हाई कोर्ट संवैधानिक, आपराधिक, दीवानी, वाणिज्यिक और केंद्र सरकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करता है। सात नए जजों के पदभार ग्रहण करने के बाद उसकी कार्यरत न्यायिक क्षमता स्वीकृत संख्या के और करीब पहुंच जाएगी।
फिलहाल कानून मंत्रालय की 19 सितंबर की अधिसूचना के मुताबिक कुल 14 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति पर मुहर लगी है। इनमें सात दिल्ली हाई कोर्ट, एक जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट, तीन झारखंड हाई कोर्ट और तीन कर्नाटक हाई कोर्ट के लिए हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन नामों पर 10 सितंबर को विचार कर सिफारिश की थी, जिसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करते हुए राष्ट्रपति ने नियुक्तियों को मंजूरी दी है।